`साहित्य समाजहे सम्वृद्ध बनैना खुँटा हो´

हिरालाल चौधरी
१० जेष्ठ २०७८, सोमबार
`साहित्य समाजहे सम्वृद्ध बनैना खुँटा हो´

कैलाली जिल्लाके घोडाघोडी नगरपालिका वडा नम्बर ५ सररहियाके युवा साहित्यकार हिरालाल चौधरी, थारु साहित्यकार मध्ये एक हुइँट् । बाबा धर्मराज डंगौरा ओ डाइ कमलादेबी डंगौराके कोखसे जन्मल २०४४ साल चैत महिनाके १३ गते इ धर्तीमे गोरा टेकलैं । उहाँक् कथा, गजल, मुक्तक, हाँस्य व्यंग्य संग्रह, संयुक्त गजल लगायत आधा दर्जनसे ढेर पोस्टा प्रकासित हुइल बटिन । थारु साहित्यिक  क्षेत्रमे नाम ओ दाम कमाइल लेखकके रुपमे स्थापित हुइल बटैं । ओस्टेके हरचाली साहित्यिक त्रैमासिक, निसराउ साप्ताहिक पत्रिका लगायत टमान पत्रिकाके आजिवन सदस्य फेन हुइँट् । एहे क्रममे निसराउ साप्ताहिक पत्रिकाके प्रधान सम्पादक सागर कुश्मी से थारु साहित्यमे केन्द्रित होके करल छोटमिठ बातचित यहाँ प्रस्तुत कैल बा ।

१.अप्ने लेखन क्षेत्र ओर कहियासे लगली ? लिख्ना आशिर्वाद कहाँसे पैलि ?
२०६० साल ओरसे हो । मै नेपाली भासाके विद्यार्थी, भासा साहित्यमे रुचि रहल ओ ओम्नही साहित्यकार मनिराम चौधरीसे हमार घरेम् डाडा रमेश सत्गौंवासे नियमित भेटघाटके क्रममे ढेरसे उठ बैठ हुइलक् ओरसे एहोंर लग्ना वातावरण बनल । मोर बाबाके आर्थिक सहयोगमे `दुखके भौंरी´ मोर पहिल कथा संग्रहके जनम हुइल ।

२.अप्नेक बाल्यकाल कैसिक बिटल बटा डिना ? कब्बु नै बिस्राइ सेक्ना जिन्गीक् सबसे यादगार पल  का बा ?
सामान्य गाँउले लवन्डा ढेरसे बाहेर खेल्नासे फेन घरही खेल्ना । घरेक् छेगरी चरहैना अस्टे अस्टे ।
खास ओसिन टे नैहो मने एक दिन छोटेम् टिपुर खेल खेलेबेर अचानक डगरम् टेक्टरके हैरोम जाके गोरा जोरसे कटगैल । अस्पताल करिब ८/१० किलोमिटर दुर सुख्खर । डल्लफिम जाइट् जाइट् रात होगैल ओ ओम्नही डगरम् डल्लफ बिलिटके बाबा ओ काका बरा दुर गिरगैनै मै भर डल्लफसे डबगैनु ।  टब्बहीं एक बगाल सुख्खर गाँउक् नँचकरुवन् बाबक् संघरियन आके हमार डल्लफ निकारडेनै । भाग्यसे बंचगैनु । ओहे मोर सबसे यादगार पल हो । 

३.अब्बेसम  सक्कु मिलाके सक्कु कैठोसम पोस्टा प्रकासन कैसेक्ली ?
अब्बेसम दुखके भौंरी (कथा संग्रह२०६३), चटनी (थारु भासक् पहिल हाँस्य व्यंग्य संग्रह २०६४)    ओजरिया केरनीक् (कथा संग्रह २०६६),
पैनस्टोपी (मुक्तक संग्रह २०७१) सहकार्य (संयुक्त गजल संग्रह २०७४), बसेरा (संयुक्त मुक्तक संग्रह २०७४) कैके ६ ठो पोस्टा प्रकाशित हुइल बा । कुछ अइना तयारी बा ।

४.साहित्यिक क्षेत्रमे लागके का पैली ओ का गुमैली ?
सायद महिन लागठ साहित्यमे लागके सामान्य नाम कमाइ सेकगैल । जेकर कारणसे आझ मै यी ठाउँमे जीवन बिमा जगतमे नायव प्रवन्धक पद मे आइसेक्नु । सायद यीहे पैनु जस्टे लागल ओ गुमाइल कलेसे खास ओसिन टे कुछ नैहो । आब साहित्यमे लागके कुछ गुमाइलहस् कुछ नैलागठ । बरु ढेर जहनसे परिचय कैना मौका मिलल ।

५.खास कैके कौन कौन बिधामे कलम चलैठि ?  कैसिन रचना मन परठ ?
मै खास कैके कथा, गजल, मुक्तक, हाँस्य व्यंग्य बिधामे कलम चलैटी आइल बटुँ । आब मन परना रचना कलेक् समाजमे जर गारके बैठल विकृति विसंगति रुढीबादी परम्परा, महिला हिंसा, राजनीतिक विकृतिहे पर्दा फाँस करके आदर्श ओ सुसभ्य समाज स्थापना करैना उद्देश्य रहल रचना रचना महिन मन परठ ।

६.अझ्कल अप्नेक गाउँ ठाउँ ओर थारु साहित्यके अवस्था कैसिन बा ?
जमाना फरक बा । अझ्कल टे हाँठे हाँठ मोबाइल बा । हिन्दी फिलिम, ग्याम खेल्ना ओस्टे अब्बा कोरोनाके कारणसे ठनिक् माहुल कुछ स्थिर बिल्गठ । नैटे ढेरसे भारत जैना लहर लागल बिल्गठ । कुछ समय पहिले हमार हिरगर अभियानके कारण साहित्यिक शृंखला गाउँ ठाँउमे लैजिना ओ हिरगर साहित्यिक उपशाखा खोलके अभियानमे लागल रहि मने कारणबस अब्बा स्थगित हुइ पुगल बा । माहोल ठिक हुइ टे फेन हिरगरके अभियान चालू हुइ । थारु भासा साहित्य फेन से हिरगर हुइ ।

७.थारु भासा साहित्यसे थारु समाजहे कैसिक आघे  बर्हैटी बटी ?
अब्बा मै अप्नही www.hirgarsahitya.com अनलाइन मार्फत बहुत स्रस्टा ओइनके समसामायिक रचनाहे स्थान ओ पुरान परम्परागत रीतिरिवाजके भिडियो पब्लिस्ट कैना ओ थारु स्रस्टनके पोस्टाके विस्तृत जानकारी डेटी विश्वभर फैलैना कोसिस करटी । इहिसे कुछ लेख रचना दस्तावेज हुइल बा ओ हुइटी जाइटा ।

८.एक्ठो सफल लेखक् बनक लाग कत्रा संघर्ष  करे परठ ?
थारु भासा साहित्य प्रति रुचि हुइल सरजक् बहुट कम बटैं ।  जेम्मे सफल थारु लेखक बन्ना अभिन चुनौती बा । अझ्कल किताब बेंचके कुछ हुइ कना बात नाके बराबर बा । ढेरसे अझ्कल स्रस्टा लोग उहे फेसबुक समाजिक संजालमे डेखे सेक्जाइठ् । मने मेहनत कर्बो टे एक दिन जरुर सफलता मिलठ् ।

९.अझकलके युबन्हे थारु साहित्यमे कलम चलाइक लाग का कैसिन योजना बनैले बटी ?
अझकल टमान स्रस्टनके मजा मजा रचाना, ओ उ समाजमे समसामायिक विषयवस्तुहे हमारिक वैब साइटमे स्थान ओ सम्मान डेना काम कर्टी बटुँ । टमान  साहित्यिक कार्यक्रम फेन हुइटी गैल बा । लावा लावा लेखक जन्मटी बटैं ।

१०.मनैंनके जिन्गीमे थारु साहित्यहे कैसिक परिभाषित कर्ठी ?
समाजके दर्पन कलक साहित्यहे मानजाइठ । आब समाजमे रहल जसकेटस मजा नैमाजा बातहे सुप्पक् चाउर केराइहस् केराके डेखाइ सेक्ना जो साहित्य हो । साहित्य समाजहे सम्वृद्ध बनैना खुँटा हो ।

११.आब लावा कोन पोस्टाके तयारीमे बटी ?
लकडाउन समय बा । यी माहुलमे प्रकासनके खास अब्बही ओसिन तयारी नैहो । माहुल बनी टे मन्साय बनी ।

१२.ओरौनीमे कुछ छुटल बात बा कि कहे पर्ना ?
ओरौनीमे जैटीजैटी कनास लागल बात कहे पर्ना अब्बा के माहुल कोरोनासे विश्व बहुत उठलपुठलके समयमे आब पहिलेकहस् समय नैरहगैल ।  सबजे अपन घरमे मजासे सुरक्षित रहटी बरु समाजिक संजाल वा मजा बिसय बस्तुके किताब, सृजनात्मक काम, अपन परिवारहे डेहे नैसकल समय डेना, पुरान पुरान संघरिया नाट नट्कुरन याद करके जीवनके आनन्द लेटि खुशी मन बनाइ किल कहेसेकम । ओ सक्कु थारु साहित्यके प्रगतिके कामना फेन करटुँ । धन्यवाद ।
हिरालाल चौधरी (सट्गौंवाँ थारु) हिरगर साहित्यिक बगाल कैलालीके अध्यक्ष हुइँट्  ।

`साहित्य समाजहे सम्वृद्ध बनैना खुँटा हो´

हिरालाल चौधरी

हिरालाल चौधरी (सट्गौंवाँ थारु) हिरगर साहित्यिक बगाल कैलालीके अध्यक्ष हुइँट् ।

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