एक एक रुपियाँ बचाइक लग भुख मारेक परठ

तिलक डंगौरा
२७ जेष्ठ २०७८, बिहीबार
एक एक रुपियाँ बचाइक लग भुख मारेक परठ


एक एक रुपियाँ बचाइक लग भुख मारेक परठ ।
चाहे जा हुइलेसेफे दुःख पिडा मनमे ढारेक परठ ।

दिन रात घाम डुपहर भुखले प्यास खुन पस्ना,
बहैटी ढेर रुपिया कमैम् कैह्के पोक्री पारेक परठ ।

काम कर्के अइबो सन्झा अन्ढार हुइल बेला यहाँ,
भलमुन हाँठ ढोके चुल्हामे आगि बारेक परठ ।

घरेक मनैनके खुशीके लग हेरो यहाँ संघरियो,
घर परिवारके सारा दुख अपनमे सारेक परठ ।

अपन दुखके बारेम घरेक मनैनकेठें नैबटाके,
चुपेचुपे आँखी मनसे आँसफे झारेक परठ ।
तिलक डंगौरा
जानकी गाउँपालिका–१ दुर्गौली कैलाली

एक एक रुपियाँ बचाइक लग भुख मारेक परठ

तिलक डंगौरा

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