आबके साहित्य गम्हिँर ओ जिम्मेवारीबोध हुइना जरुरी बा

छविलाल कोपिला
७ भाद्र २०७८, सोमबार
आबके साहित्य गम्हिँर ओ जिम्मेवारीबोध हुइना जरुरी बा

आबके साहित्य गम्हिँर ओ जिम्मेवारबिोध हुइना जरुरी बा

थारु भासा, साहित्यक क्षेत्रम छविलाल कोपिलाक योगडान बरवार बाटिन् । उहाँ कब्बु नि मिच्छावन मान्क कैयौं मेरिक साहित्यिक, भासिक ओ सांस्कृतिक अभियान चलैटि बाट । समाजक विकृति ओ बिसंगतिहँ टिस्लोर काँटिले मर्ना ओ सुधारक डग्गरम लन्ना मेरिक साहित्य बाटिन् । डेउखरिया लवज रलक साहित्यकार कोपिला कैयौंठो साहित्यक पोस्टा ओ पाठ्क्रम समेट निकार सेक्ल बाट । उहाँ थारु भासा साहित्यक बल्गर ढुरखम्हाँ हुइट कनाम कौनो बिमति निहो । कोपिला थारु भासम बन्लक चारठो सलिमाम फे अभिनय करसेक्ल बाट । भुँइह्यार, लाज, लावाजुनी ओ भुरभुरा रहर सलिमाम खास भुमिकाम अभिनय कैसेक्ला बाट । बहुमुखी प्रतिभा रलक दाङ डेउखर बैठुइया कोपिलासे थारु साहित्यक बारेम सोम डेमनडौरा करल बाटचिट प्रस्तुत कैल बा ।

१.साहित्यिक यात्रा कैह्यासे सुरु कर्लि ?
कहियासे सुरु कना बाट् ठिक्के इहे मिति साल याड कैना टे कर्रा हुइल् । मने अन्मान लगाइबेर २०४७÷०४८ ओर हुइसेकठ् । उ समय भर्खर भर्खर सिख्नौटि सिर्जना, बिसेस कैके सायरि ओ छोट छोट कविता लिखजाए । उ समयके लेखन, गम्हिँर लेखन नैरहे । पाछे २०५५÷०५६ साल ओर गाउँघर साप्ताहिकमे कुछ समाचार ओ कविता प्रकासनमे फेन निरन्तरता पाइल । कुछ कविता पत्रिकामे प्रकासित हुइल् । असिके हेरेबेर लेखनके सुरुवाट साहित्यिक यात्रा मन्ना कि प्रकासिट समयहे औपचारिक लेखन मन्ना मै अक्मकाइल बटुँ ।

२.कौन छुवाइले लिखाइओंर टानठ् ?
सुरु सुरुमे रहरले केक्रो सुन्डर सिर्जनाले टानल, पाछे समाज भिट्टरके टमान संस्कृति, विसंगति, विभेद अभिन ढेर छुवल् । डेसके अस्थिरता, अराजकता लगायतके परिदृष्टी लेखनके कैयौं रचनागर्भके रुपमे डेखा परल ओ उहे एक्ठो उत्प्रेरणाके रुपमे आइल जेकर निरन्तरता हो छविलाल कोपिला ।

३.अप्न लेखनक उद्देस्य का लेल बाटि ?
स्वाभिक डायराभिट्टर आट्मसन्टुस्टि ओ बाँकि समाज परिवर्टनके लग । सोसन, उट्पिडनमे परल् वर्गके पच्छमे साब्डिक खबरडारि जिहिसे सक्हुन सौकेर बनैना । आज समाज विकृटि ओ विसंगटिक् भारि रहमे फँस्गैल बा । उहिहे कसिके बचैना हो चिन्टक विषय बा मुले थारु समुडाय यि सवालमे सचेट नै हो ओ विकृटि हटैना नाउँमे कुछ मनै विकृटि फैलैटि फेन लागल् बटाँ ओइनहे कसिनके सहि डग्गरमे नन्ना ? डोसर सवाल फेन बा । उहेसे अच्छर मार्फट सामाजिक विकृटिके बिरुद्धमे आवाज उठैन ओ सक्हुनहे सचेट बनैना, जिहिसे हमार पहिचान खुले ओ हम्रे हमार कैह्के गर्व करे सेकि ।

४.साहिट्यम अप्न कसिन विचार डेना मन परैठि ?
साहित्यमे विचार डेना अच्छर प्रस्टुटि हो । उहेसे मेरमेरिक विढा मार्फट समाजके सकारात्मक ओ नकारात्मक चिजहे टुलनात्मक ढंगसे अक्षरके माध्यमसे भाव चित्रण कैना, जिहिसे समाज समयमे जिम्मेवारीबोध होए । साहित्य कला फेन हो उहेसे विचार प्रस्टुटिके लग कला अनिवार्य चाहठ् । जेकर लग भाव गम्भिर्यता बनाइक लग बिम्ब ओ प्रतिकके कलात्मक बनाजाइठ् । कलात्मकता सौन्दर्यके एकठो हँगिया हो । सौन्दर्य मानव जिवनके आत्मसन्तुष्ती संगे हौसला फेन डेहठ । साहित्य एक उर्जाके स्रोत फेन हो । उर्जा बिनाके साहित्य मनैनहे पङ्गु बनाइठ् । निरासावादी साहित्य मनैनहे चिन्तित ओ निरास बनाइठ् । उहेसे साहित्यमे सकारात्मक उर्जा हुइना चाहि कना मोर मान्यता हो ।

५. मन पर्ना लेखन विधा कौन हो ? कारण ?
मोर खास कै काव्य विधा जो प्रमुख विधा हो । कविता मोर ओेंरि विधा फेन हो । पछिल्का समय मोर लग गजल, मुक्तक पहिचानके विधाके रुपमे फेन डेख परल बा । ओस्टके बट्कुहि, हाइकु, गिट लगाके उपन्यास, निबन्ढमे फेन कलम चलैले बटुँ । कविता संरचनाके हिसाबले छोट रहना ओ भावगट रुपमे गम्हिंँर विसयबस्टु रहलक ओरसे पाठकके लजर फेन ज्याडा लग्लक हुइ । यि विधा छोट समयमे पर्हे सेक्ना छोट मिठ सिर्जना हुइलक ओरसे फेन मोर छनोटमे कविता परल हुइ ।

६.अप्नक उपन्यास यथार्थपरक रहठ् कनाम कसिन प्रतिक्रिया बा ? चुरिनियाँ कसिन उपन्यास हो ?
मै सोच्ठुँ, मोर हरेक सिर्जना यथार्थपरक होए या यथार्थपरक बनैना गेंह लगैठुँ । काकरे कि मोर लेखनके पहिल प्राथमिकता समाज, राष्ट्र, कला, संस्कृति हो । समाजके मेरमरिक परिदृष्य मोर लेखनके विसयवस्तु हो । उहेसे उपन्यास फेन यिहे फ्रेममे हुइ कना महिहे लागठ् । चुरिनियाँ मोर ढेर मनैनमे खुलभुल्लि ओ मन परैलक उपन्यास हो । इ खास कैके कमुइयँँँँँँनके जनजिवनसे सिमोटल सामाजिक उपन्यास हो । यम्हें समाजमे डेखपरल बहुट सोसन, डमन, अन्धविस्वास ओ गरिबि डेखागइल् बा ।

७.उपन्यास पहर्क इ म्वाँर घटना होे कना पटा पैल बाट ? या पटा पाइल् ब्याला अप्नक प्रतिक्रिया का रहठ् ?
कुछ कमुइयँन पटा पैले बटाँ । ओस्टक कुछ चुरिनियैंसे सटवा पैलक मनै फेन । जब मोर मुक्टिक खोज ओ चुरिनियाँ उपन्यास बजारमे आइल टब कुछ कमुइयँन अपन बारेमे छप्लकमे खुसि व्यक्ट कैलाँ ओ पुरान डिन समझके अपन अनुभव फेन सुनैलाँ जिहिसे महिहे ठप विसयवस्तु मिलल् ओ लिख्ना उर्जा फेन बर्हल् । चुरिनियाँ उपन्यासके बारे ढेर जन्हुनके जिज्ञासा रहिन कि टुँ यि सब कसिके लिख्लो कैह्के ? इ कहानि अप्नेक वास्तविक हो कि काल्पनिक ? ओ कैयौं जाने इ पर्हके फुरेसे चुरिनियाँ आइहस् लागठ् फेन कलाँ । सायड एक्ठो लेखकके लग ओहाँनके मूल्य फेन यिहे हो कनाहस् लागठ् । प्रतिक्रिया लेखनके लग उर्जा फेन हो । उहाँ लोगनप्रति आभारि बटुँ ।

८.थारु साहित्यम मौलिकता कम महसुस कर्गिल् बा, यिहिंका कसिक लेल बाटि ?
यि सहि बाट हो । काल्हके अवस्थामे थारु साहित्यमे जौन अपनत्व (अपनपन) रहे, अब्बे लगभग ओरासेकल अवस्था बा । हमार प्रभाव औरे जाटिनके डेखासिकि ज्याडा ओ अपन बिस्रैटि जैना मानसिकता बा । डोसर बाट हमार धारणा फेन समयसंगे बहना नाउँमे जरउँखार अपन मौलिकता बिस्राके लावा भित्रैना चेट । मुले इ अन्य समुडायमे नैहो । प्रभाव टे आउर समुडायमे फेन परल बटिन । मने ओइने अपन मौलिकता टेकके आघे बर्हटि बटाँ । थारु समुडायमे असिन चेतना स्तर बहुट कम बा । बहकावमे लग्ना प्रवृट्टि बा उहे ओरसे साहित्यमे फेन इ समस्यासे चुकल नैहो । काल्हके डिनमे हमार पुर्खन गिट–वाँस, बट्कुहि, बुझक्कर गाइँट् सुनाइँट् ओम्हेँ थारुनके जनजिवन, कला संस्कृति बिल्गाइँट् रहे । लकिन अब्बेके साहित्य कहोंर जाइटा अनुमान लगैना कर्रा बा । लावा पुस्टा टे आउर जिम्मेवारिसे पुरे बेखबर बा । यम्हें हमार अपन कमजोरि फेन हुइ सेकठ । कुछ संघरियनभर डटके लागल बटाँ, यम्हें खुसि लागठ् ।

९.यूवावन साहित्यओंर रुचि डेखैलसे फे अन्य उमेरक मनैन्हँक रुचि निडेख्परठ् । का जे असिन हुइलक हो ?
बुझाइके अभाव हो । ठँरिया पुस्टा अपन ठँरियापन डेखैना ओ पुरान पुस्टा मौलिकताहे एकहोरो बुझाइ फेन इ समस्या हो । इ विसयमे गहिंर छलफल सहकार्य कैना जरुरि डेख्ले बटुँ । अधिकांस ठँरिया पुस्टाके लेखन हलुक प्रेम प्रणयसे उप्पर उठे नैसेकल हो । जौन उमेर समुह एकहोरो अपन प्रेम प्रलापमे डुबल बा । पुरानपुस्टा प्रेणयसे फेन अपन मौलिकता खोजो कना रटानमे बा । उहेसे विचारमे मिलावट हुइना जरुरि बा । काकरे कि हमार अपन मौलिकता फेन आवस्यकता बा ओ समयसंगे लावापनके फेन ओत्रे आवस्यकता बा ।

१०.वर्तमान थारु साहित्य लेखनक भविष्य कसिन बा ?
सुन्डर बा । मने यकर अगवाइ कैना संघरियन सहि डग्गर डैखैना जरुरि बा । साहित्यमे भारि विकृति आइल बेला समयमे सचेट बनैना जरुरि बा । आझ ठँरिया पुस्टाके भारि जमाट साहित्यमे लागल डेख्परल बा । लेकिन ओइनहे अगवाइके अभाव डेखटुँ । जे अगवाइ कर्टा उ अपनहे नियन्त्रनमे नैहो इ बिडम्वना हो अठवा अप्नहे छिहर–फुहर साहित्य लिखके हमार साहित्य फुहर बनैटि बा । उहिसे भविस्यके कल्पना कसिक कर्ना ?

११.थारु साहित्यकारन् औरक किताब पहर्ना बानि निहुइटिन् कनाम अप्नक मत कसिन बा ?
सबसे ज्याडा कमजोरि यिहे हो । थारु समुडाय आगे बर्हे नैसेक्लक एकठो प्रमुख कारन फेन इहे हो । कौनो फेन चिज जानक् लग टे पह्र्ना जरुरि रहठ् । लेकिन हम्रे उ नैकैठि । बेन हम्रे किहुन् सुनलभर फट्रंग उरैना सिपार बटि । यहाँ आनक किताब पर्हना कलक लावा ज्ञान हाँसिल कैना हो इ सासोट सत्य हो । मुले हम्रे किताब पर्हना ओर ढियान नैडेठि । हमार ढियान टे गडर–बडर कसिक ढेर लिखुँ बा । जिहिसे हमार भविस्यप्रटि जो खटराके चिन्हाँ लगा डेहठ् ।

१२.थारु साहित्यक किताबक प्रकासन संख्या बहर्टि गैल बा । मुले पाठक महाकम बाट । असिन हुइनाम साहित्यकार हुँक्र पाठकक चाहल चिज डिह निसेक्लक हो या अन्य कारण ?
पहिल बाट थारु समुडायमे पठनसंस्कृतिके विकास हुइ नैसेकल हो । डोसर बाट स्तरियताहे ढियान नैडेके रहरमे किताब प्रकासन कैना इ डुनु बाट् डोसि हो । उहेसे लेखनमे स्तरियता ओ पठनसंस्कृतिके विकास कैना जरुरि बा । यकर लग सहि विषयवस्तु छन्ना ओ गम्हिँर लेखनके जरुरट बा जिहिसे पठन रुचिप्रति मोह जगाए ।

१३.अभिनसम् कौनो लेखक हुँकन्हँक कृतिक समिक्षा, समालोचना महाकम डेख परठ् । का जे बल्गर समालोचक आइ निसेक्ल हुइट ?
हमार अभ्यासके कमि फेन हो । हमार ठन पठनसंस्कृटि नै हो । ओकर एकठो कारन इ फेन हो । जब किटाबे नै पर्हब टे समिच्छा अठवा समालोचना लिख्ना बाट फेन नै आइठ । डोसर बाट समालोचना कर्रा विसय हो । कौनो फेन समालोचना लिखक लग उ विसयमे गहन अढ्ययनके जरुरि परठ् । बिढागट गहन अढ्ययन चाहठ् । हम्रे अहोंर ढियान नै डेठि । उहेसे इ अवस्ठा डेखा पर्लक हो । हमार समुडायमे समालोचना लिखुइयनके संख्या बहुट कम बा । उहाँ लोग सक्कु विसयवस्टु सिमोटे सेक्न बाट फेन नै रहल् । उहेसे इ टिट सट्य हो ।

१४.साहिट्यक विकासक लाग साहिट्यिक संस्ठन्क भूमिका, अभियान ओ प्रयासक बारे अप्नक ढारना कसिन बा ?
साहिट्य विकासके लग संस्ठाके भारि भूमिका बटिस् । कौनो फेन बच्चाहे बर्हाइ–पौंर्हाइक लग ओकर अभिभावकके आवस्यकटा जत्रे संस्ठाके भूमिका हो । थारु समुडायमे साहिट्यप्रटि रुचि करुइयनके भारि बगाल बा मने मञ्च नै पाके कैयौं पलायन होसेक्लाँ ओ अभिन फेन हुइहि । सायड इहेसे हुइ थारु साहिट्यके उट्ठानके लग विभिन्न संस्ठा फेन गठन हुइल बा ओ आपन सक्रियटा फेन डेखैटि जाइटा । बिसेस कैके पच्छिउँहाँ थारुनमे इ सक्रियटा ढेर बिल्गाइटा । थारु भाषा तथा सहिट्य संरक्षण मञ्च दाङ, जंग्रार साहित्यिक बखेरी बर्दिया, जिउगर साहिट्य समाज ओ हिरगर साहिट्यक बगाल कैलाली लगाके संस्ठा प्रटिनिढि संस्ठा हुइट । ओट्रे किल नाहि थारु लेखक संघसे प्रटेक बरस रास्ट्रिय स्टरके कारेकरम फेन कैटि आइल बा । दाङ, कैलाली, बर्दिया कारेकरम कै सेक्ले बा कलेसे असौं रुपन्देहीके उँचडिहवामे चैटके २२ ओ २३ गते कैना टयारिमे बा । असिके हुइना संस्ठागट रुपमे मेरमेरिक साहिटियक गटिविढिसे फेन साहिट्यकारमे उर्जा डेहल बिल्गाइठ् । लावा डग्गर त्रैमासिक, हरचाली त्रैमासिक, बिहान लगाके साहिट्यिक पत्रिका लग्टार रुपमे निक्रटा । भासा साहिट्यमे अन्टक्र्रिया, छलफल, हरजिट्टा, प्रसिच्छन लगायटके क्रियाकलाप फेन हुइटि बा यिहिसे फेन यकर भविष्य अनुमान लगाइ सेक्जाइठ् ।

१५. थारु साहिट्यक लाग नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक कौनो भूमिका कह परि कलसे ?
थारु साहिट्यमे नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानके भारि भुमिका बटिस् । आर्ठिक, प्राविढिक सहयोगके खाँचो बा थारु साहिट्यमे । यडि चहना हो कलेसे हम्रे इ प्रतिष्ठानसे सहकार्य कैके ढेर काम करे सेक्जाइठ् । समय समयमे भासा–भासिक किटाब फेन निकारठ् । ओम्हें हमार प्रस्टुटि हुइसेकठ् । लेकिन हमार लेखनमे स्टरियटा नन्ना जरुरि बा । प्रज्ञा प्रतिष्ठान छिहर फुहर किटाब प्रकासन नै करठ् । उहेसे लिखुइयन गम्ह्ँिर बन्न जुरुरि बा । सहकार्य ओ समन्वयके लग हाँठ नमैना फेन हो मने हमार उहाँसमके पहुँच नै हो ।

१६.थारु साहिट्यक लाग आपन कर्लक प्रयास थारु समुडाय सम्मान करलहस् लागठ् कि निलागठ ?
थारु साहिट्यमे मै का कैलुँ यकर मूल्याङ्कन समुडाय कैना विसय हो । टब्बोपर खास कै थारु भाषा तथा साहिटत्य संरक्षण मञ्चके अगवाइके साठे लावा डग्गर त्रैमासिक पत्रिकामे मोर भारि लगानि बा । करिब एक डर्जन मोर आपन किटाब प्रकासन हुइल बा इ फेन थारु साहिट्यमे लगानि हो । डेरह डर्जनसे ढेर मोर सम्पाडनमे पत्रिका बा साइट इ फेन लगानि माने सेक्जाइठ् । बाट् सम्मानके रहल् । मोर कृटि, पत्रिका ओ संस्ठाप्रटिके सहयोग सम्मान हो । मुले संस्ठागट रुपमे कम सम्मान हुइ सेकठ् उ मोर बसके बिसय नै हो । उ समुडायके मुल्याङ्कन कैना बाट् हो । आजसमके मोर पुरस्कार ओ सम्मान हेर्ना हो कलेसे डेरह डर्जनसे ज्याडा बा । गोचाली परिवारके सगुनलाल स्मृति प्रतिष्ठान बर्दियासे डेजैना ‘सगुनलाल स्मृति पुरस्कार’ ओ थारु पत्रकार संघ दाङके सम्मान बाहेक थारुनके नाउँसे खोलल संस्ठाके कौनो पुरस्कार अठवा सम्मान नै हो । साइट थारु समाजमे मोर लगानि कम हुइल हुइ या कहि अभिनसम मोर करे पर्ना ढेर काम बा ।

१७.का जे थारु साहिट्यम कलम चलैना जरुरि मन्ठि ?
भासा लोप हुइटि गैलक चिन्टा बा, कला, संस्कृति ओ ढरम लोप हुइलक चिन्टा बा । अब्बेके सन्डर्भमे हेर्ना हो कलेसे भासा साहित्यके आत्मघाती सिर्जना, संस्कृति ओ ढरमसे समाज गम्हिँर डुर्घटना ओर जइटि बा । थारु अगवाइ करुइयन इ बिसयमे बोल्बे नैकैठाँ । कबो बोलि डरहि टे व्यवहारमे लागु नैकर्ठां । उहेसे इ सब विकृतिसे समयमे सचेट करैना जरुरि डेख्के साहित्य ओर लगहि पर्ना ओ साहित्य मार्फट खिट्कार्ना जरुरि डेख्के यहोंर लग्लग हो ।

१८.एक्का घचिक प्रसंग बड्लि, अपन ट कलाकार फें हुइटि अभिनसम कैठो सलिमा ख्याल सेक्लि ?
मैं व्यवसायिक कलाकार टे नैहुइटुँ । टब्बोपर मौका चानस मिलठ् टे कबोजबो कलाकारिता क्षेत्रमे डेखा परठुँ । आझसमके मोर कलाकारिता हेर्ना हो कलेसे मैं चारठो थारु भासक सलिमामे खास भुमिकामे खेलसेक्ले बटुँ । सुरुवाटके पहिल सलिमा ‘भुँह्यार’ हो । ओकर पाछे लघु सलिमा ‘लाज’ इ सलिमा कोरिया, क्यानडा, जर्मल लगाके डेसमे डेखागइल बा कलेसे अन्तराष्ट्रिय पुरस्कार फेन जिटके आइल बा । ओकर पाछे बन्लक ‘लावाजुनी’ ओ ‘भुरभुरा रहर’ प्रदर्सनके तयारि बा । कुछ डिनमे इ डुनु सलिमा पहिले टमान जिल्लामे च्यारिटि सो कर्ना ओ पाछे हलमेसे सार्वजनिक हुइल बा ।

१८.कला, साहित्य पहिचानक सवाल हो कनाम अप्नहँ लागठ् ?
यि विसयमे मोर सहमट बा । भासा, कला ओ संस्कृति कौनो फेन जाटिके पहिचान हो । यडि भासा, कला ओ संस्कृति ओरागैल कलेसे सम्झि हमार पहिचान फेन हेरागैल् । साहित्य संस्कृत्किे एक हँगिया हो । हमार थारु समुडायमे ढेर मेरिक लोकसाहित्य बा । ढमार, सजना, मैना लगायटके गिटिसाहित्य, लोकबट्कुहि फेन साहित्य हो । पछिल्का समय इ बाहेक आउर विधमे फेन साहित्य सिर्जना हुइ भिरल बा । ओकर भावमे यडि हमारपन या मौलिकता बा कलेसे उ फेन हमार साहित्य माने सेक्जाइठ् । जस्टे अझकल गजल, मुक्तक, हाइकु आडि ।

१९.अन्त्यम, अप्नक मन पर्लक थारु साहित्यक अभियान कै डि ना ।
साहित्यिक अभियानके बारेम् कहेबेर अब्बेके अवस्थामे टमान साहित्यिक संस्थाके बिचमे हुइटि अइलक छलफल, अन्तरक्रिया, कविगोष्ठी आडिहे लेहे सेक्जाइठ् । गइल तीन बरस यहोंर थारु लेखक संघके अगवाइमे थारु साहित्यिक मेला यकर सम्झहि पर्ना उदाहरण हो । ओस्टके टमान थारु साहित्यिक संस्था लोगके गतिविधि फेन अभियानके रुप हो । धन्यवाद ।


प्रस्टुटी : सोम डेमनडौरा

आबके साहित्य गम्हिँर ओ जिम्मेवारीबोध हुइना जरुरी बा

छविलाल कोपिला

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