अस्टिम्की टिहुवार ओ अस्टिम्की चित्रकलाके महत्व

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’
१५ भाद्र २०७८, मंगलवार
अस्टिम्की टिहुवार ओ अस्टिम्की चित्रकलाके महत्व

अस्टिम्की टिहुवार ओ अस्टिम्की चित्रकलाके महत्व

विषय प्रवेश
टरटिहुवार मनैन्हे चौकस ओ चम्पन बनाइठ । हरेक जाति समुदायके अपन मौलिक तौरतरिकासे मन्ना टमान टिहुवार रहठ । थारू एक अलग पहिचान डेना मेरिक अपन भासा संस्कृति एवम् सामाजिक रीतिरिवाज रहल जात हो । थारू जात अन्य जात ओइन जस्टे टमान टिहुवार मनैटि आइल बा । उ मध्ये ः १. माघ, २. बर्का डस्या, ३. फगुइ, ४. ढुरहेरि, ५. डेवारी, ६.बर्का अँट्वारी, ७. अस्टिम्की, ८. गुरही, ९. बर्का पूजा, १०. हरेरि, ११. हरढावा जस्टे टमान टिहुवार सामूहिक रुपमे मनैटि आइल बा । थारूनके अस्टिम्की एक महत्वपूर्ण महिलनके मन्ना टिहुवार हो ।

अस्टिम्कीके तयारी
यी टिहुवारके आगमनके क्रममे तयारी सुरु करजाइठ । चित्र बनैना भिटा उज्जर माटिसे पोटजाइठ । अस्टेक मिठमिठ टिनकके फेन खोजल रहठ । जस्टे, केरा पकैना, दही जमैना, बारिक खिरा, अमरुट आदि फल ओहे दिनके लाग बचाइल रहठ । बरट बैठुइया महिला, युवतीनके लाग अनिवार्य लावा कपरा किनके सिवाके ठिक बनाइल रहठ ओ गरगहना फेन व्यवस्था करल रहठ ।

अस्टिम्कीके चिन्हाँरि
अस्टिम्की टिहुवार खास कैके महिलनके मनैना टिहुवार हो । मने अझकल कुछ युवन फेन यी बरट बैठे लागल बटैं । यी टिहुवार भदौ महिनाके अस्टमीके दिनमे गाउँके बरघरिया वा महटाँवाँके घरके भिटा वा डेहरिमे कृष्ण चरित्र सम्बन्धी टमान वृतान्तहे चित्रके रुपमे बनाइल चित्रके पूजा अर्चना कैजाइठ । यी टिहुवार कपिलवस्तु, रुपन्देहीसे पस्छिँउ दाङ, बाँके, बर्दिया, कैलाली, कञ्चनपुर, सुर्खेतमे धुमधामाके साथ मनाजाइठ । सप्तमीके रातमे मुर्गा बोल्नासे पहिले रातके मिठ मच्छी, अन्य टिना पकाके डर खैना चलन बा जिहिनहे थारू भासाामे डट्कन खैना फेन कहिजाइठ । ओकरबाड अस्टमीके दिनभर बरट बैटुइयन निराहार बरट बैठ्ठैं । बिहानसे अस्टिम्कीके चित्र बनैना कार्यमे लागल रठैं । चित्र बनुइयन फेन निराहार रठैं । चित्र बनैना ठाउँमे बरट नैबैठल मनै जैना बर्जित रहठ ।

साँझके बरट बैठल महिला दिदीबहिनियन लहाखोरके सिंगारपटार गरगहना पेहके टठियामे चाउर घुन्यासरके फूला, बरल डिया, एक जोर कगडि वा निम्वाँ, लाल सेन्डुर, धुप आदि लेके अपन कुल डेउटनाके थानमे डिया बारके प्रत्येक बरट बैठुइयन घरघरसे निकरके अस्टिम्की चित्र बनाइल महाटाँवाके घरमे जम्मा हुइठैं ओ टठियामे नानल फूला, चाउर, कगडी ओहे पुजा करना कोठामे लैन लगाके ढारके गरढुरिनियाँसे पुजापाठ सुरु होके पालिकपाला सबजे भिटक् चित्रमे बनाइल चित्रमे टिका लगाके पुजा करठैं । पुजा करके युवा लवन्डन महिलन नानल निम्वाँ कागडीक् भेँठ्नी काटके भेँठ्नी किल ढारके निम्वाँ, कागडी लेके जैठैं । यी काम प्राय लवन्डन अपने मन पराइल लवन्डिक ढारल युवतीके निम्वाँ वा कागडीके भँेठ्नी कट्ना प्रचलन बा । टबेमारे लवन्डन उ बेला टैछोरमैछोर करल दृश्य रमझम ओ हेर्ना लायक रहठ । बरट बैठुइयन अपनअपन घर जाके टमान मेरिक फलफूल परिकार एक भाग अलगाके एकएक चुटि सब फलफुलके भाग चिकुटके अग्नीमे चर्हाके धुप बारके पुजापाठ कैके पानीसे छिट्के फलफुल खाके फेन महाटाँवाँके घर जाके रातभर कृष्ण लीला गीत गैना, चलन बा । अस्टिम्की गीत गैनासे पहिले चारु ओरिक डेंउटा ओ डेबि दुर्गाहे समझके किल गीतके सुरुवात करेपरठ ।

सम्ह्रौटि
पूरुब मै सुमीरौं सुरज गोसाइँ
पछिउँ मै सुमिरौं रमझम (निरञ्जन) देवी खरटारे ।।१।।
उटरे मै सुमिरौं हरि कविलासे
डखिने सुमिरांै शिव जगन्नाथ ।।२।।
आकाश सुमिरांै इन्द्र ओ चन्द्र
पाटाल सुमिरांै बासुकी नाग ।।३।।
पहिल मै सुमिरांै गउँकी भुइह्यार
हमारी मेररिया डिउँटा करही रक्षा पाल ।।४।।
डिहबु मै सुमिरौं डेउ डेवारिन
हमरी मेररिया करो रे रक्षा पाल ।।५।।
मेररिया मझिमारे सुमिरांै मै टुही
कण्ठ बैठो मोर गीत डेहुँन सिखाइ ।।६।।

पुरुबओरमे सूर्य डेंउटा, पस्छिउमे रमझम निरञ्जन डेवी, उट्टरमे पाटन डेवी (हरि कविला), डख्खिनेमे शिव जगन्नाथ, आकाशओर चन्द्र ओ इन्द्र पाटालमे बासुकी नाग डेउँटा ओ गाउँक साझा ठन्वाँ भुइहयार (मन्दिर) आदिके समझके किल यी टिहुवार कृष्ण लीला थारु गीत गाजाइठ ।

अस्टिम्की गीतके कुछ अंश
पहिल ट सिरीजिट गैल जलथल ढरटी
सिरीजिट ट गैल कैल कुश रे डाभ ।।१।।
डुसर ट सिरजल अन्न कही पात
सिरीजिट गैल अन्न कही विरोग ।।३।।
टिसर ट सिरजल अन्न कही डार
सिरिजित गैल अन्न कही फल ।।४।।
चौठा सिरिजित गैल अन्न कही फूल
सबहु डेउँटा हो मिली लेउ फुल बास ।।५।।
सिरिजित गैल कारी मनखवा
कारी मनखवा कल मै बरी बटुँ ।।६।।
कारी मनखवा कहल मै बरी बटुँ
डिउँटा जे कहल मै बरी बटुँ ।।७।।
कारी मनखवा कहल मै बरी बटुँ
सिरिजिट गैल बिरछिक रुखवा ।।८।।
बिरछि चरहल बारु कन्हैया
बिरछि चरहल बारु कन्हैयाँ किचिर किचिर बोल ।।९।।

यी संसारमे सबसे पहिले जल ओ थलके उत्पत्ति हुइल । टबसे क्रमश कुश, अन्न, फल, मानव, रुख विरुवा आदिके उत्पत्ति हुइल हो कना बाट गीतमे जनाइल बा । रातके महाटाँवाँके घरमे जग्राम रहिके बिहान सबजाने काल्हिक टठियामे बरल डिया, फुला, निम्वाँके भँेठ्नी, आछट पट्टा आदि लग्गेक लडियामे अस्राइ जैठैं । विशेष सजढजके साथ सजल युवतीहुकनके लाइन एकडम सुन्दर ओ मनमोहक रहठ । लडियासे अस्राके लहाखोरके घर लौटके गोब्राके भान्सामे पकाइल चोखो पुइँक् साग, मासके गेडाके टिना, मच्छी आदिके परिकार सहितके खाना तयार हुइठ । यी सब परिकार टिना छुट्टे टेपरीमे एक भाग अलग्गे ढरजाइठ । यिहिनहे अग्रासन फेन कहिजाइठ । ओकरबाद उ टिना, भात सब मिलाके अग्नीमे डेके पुजापाठ कैके खैठैं । छुट्याइल अग्रासनहे भोज करल महिला भर लैहेरमे अपन डाडुभैयनहे डेहे जैठैं ।

कौन कौन भगवान ओ प्रकृतिके पूजा कैजाइठ ?
थारू प्रकृतिपूजक जात हुइँट् । उहाँ लोग अपनसंग जा बा उहिनहे उपयोग करठैं । जीवनयापनके क्रममे जाजा प्रयोग ओ उपयोगी हुइल उ सबहे सम्मान करल चित्रके पूजा हो अस्टिम्की ।

अस्टिम्कीमे बनाइल चित्रके नाउँके सूची
१. कान्हाँ, २. (सूर्य) दिन, ३. चन्द्र (जोन्ह्याँ), ४. पाँच पाण्डव (पाण्डो), ५. कौरव (कौराओ), ६. डोली, ७. बनुवाँ, ८. मन्जोर, ९. उँट, १०. हाँठी, ११. लाउ, ११. बसिया बजाइल कान्हाँ, १२. कुक्रा, १३. रौना, १४. सप्वा, १५. राम ओ सीताके अभिभावक, १५. घोरुवा, १६. मुर्घा, १७. रैनी मछरिया, १८. रुखवा, १९. बँडरा, २०. बघुवा, २१. पुरैनक पाटा अइसिक टमान प्राकृतिहे पूजापाठ करना टिहुवार बारे टमान मिथक बा । यी टिहुवारके चित्र खासमे मूल खाकाके भिट्टर तीनठो बोर्डरमे चित्र अंकिट कराके बनाजाइठ ।

१. कान्हा–यी भिटाके सबसे उप्पर भागमे रहठ ओ चित्रके टरेक रुखवामे फेन बसियासहित चित्रित रहठ । यी टिहुवारके मूल नायक कृष्ण हुइँट् । उहाँ सब जीवजन्तु, पशु प्राणीहे अपन बसियाके ढुनसे मोहित बनैना कला रहल ओरसे रुखवक् टिप्पामे बैठ्के बसिया बजाइल चित्र रहठ । उहाँक विशेष पूजा आराधाना कैजाइठ ।

२. दिन– थारू जाति प्रकृतिके पुजक हुइँट् । यी भिटाके बाँउओर अंकित रहठ ।

३. जोन्ह्याँ– यी टिहुवारके जोन्ह्याँके फेन पूजा कैजाइठ । अस्टिम्की चित्रके डाहिनओर अंकित रहठ ।

४. पाँच पाण्डव– थारू समुदायमे पाँच पाण्डव विशेष पूज्ना डेउटाके रुपमे मानजैठैं । पाँच पाण्डव हरेक गाउँके साझा ठन्वाँमे विशेष स्थान रहठ । यी टिहुवारमे चित्रके पहिल पंक्तिमे रठैं । ओइने हाँठमे छाटा पकरल् चित्र बनाजाइठ ।

५. कौरव– यी टिहुवा्के डोसर लहरमे कौरवहँुक्रे फेन स्थान पैले बटैं । पाण्डवहुकनसे टरेक पंक्तिमे कौरवके चित्र रहठ । उहाँहुक्रे ठोरचे उग्र प्रवृतिके रहल ओरसे हाँठमे बन्दुक पक्रल चित्र बनाइल किंवदन्ती रहल बा कलेसे औरे मत अनुसार कहुँकहुँ यी लैनमे महिलाके चित्र फेन पाजाइठ । महिलाके चित्र भर सोह्र हजार गोपिनीनके संकेतके रुपमे रहल ओरसे महिलनहे पुजल मिथक फेन बा ।

६. रौना– अचमके बाट अस्टिम्की टिहुवारमे बाह्रठो कपार रहल रौनाके फेन चित्र अंकित रहठ । एकरमे टिका नैलगैठैं । विशेष कैके छोटछोट लवन्डिन किल एकरमे टिका लगाके घाउ खटरा नाहोए, बिरामी नाहोए कहिके पुकारल पाजाइठ । यी चित्रके बारेमे विद्वान महेश चौधरीके फरक मत बा । यी चित्र रौनाके नैहुके सृष्टिकर्ता ब्रम्हाके हो । कालान्तर चित्र बनाइबेर कपार ढेर डेखके रौनाके हो कहिके व्याख्या करल तर्क करठैं । औरे विद्वान अशोक थारू, डा. कृष्णराज सर्वहारी बाह्रठो मुन्टा रहल ओरसे पूर्खाहुक्रे बरमुर्वा कठैं । एकर अर्थ बाह्रठो मुन्टा रहल बुझाइठ । अभिन यी बारे अनुसन्धान करना जरुरी बा ।

७. अस्टेक, अस्टिम्कीके चित्रमे प्राचीन समयमे समयके सूचक मन्ना मुर्गा, घरके रक्षक कुकुर, जंगलसंग निकट रहल कजरिक बन्वाँ, हाँठी, बाघ, बन्डराके टमान प्रकृतिके पूजा यी टिहुवारमे कैजाइठ ।

८. मच्छी– खास कैके मच्छी थारू समुदायमे विशेष मानजाइठ । यी मच्छीहे रैनी मछरियाके नाउँसे पुजजाइठ । यी ढरटीके सृष्टिसंगे सबसे पहिले मच्छीक अवटार हुइल ओ कान्हाँके पिटा बासुदेव (ईसरु) खेतीपातीके लाग हर, जुवा आदि काटे जैना क्रममे लडिया नाँघेबेर ओहे मच्छीमे बैठ्के लडिया नाँघल किंवदन्ती थारु अस्टिम्की टिहसवारके गीतमे वर्णन बा । हरेक शुभ कार्यसे मृत्य संस्कारमे समेत प्रयोगमे अइना मच्छीहे रैनी मछरियाके नाममे पुजजाइठ । अस्टिम्की टिहुवारमे फेन फलहार करेबेर अनिवार्य मच्छिक पकवान रहठ ।

९. अस्टेक डोली, रामके पिता दशरथ ओ सीताके पिता जनकके सम्धी सम्धीके चित्र, मन्जोर, लाउ, ढेंकी, हर जोटलके चित्र टमान चित्रमे पूजापाठ कैना यी टिहुवारके विशेषता हो ।

अस्टिम्की टिहुवारके महत्व
हरेक टिहुवार अपन महत्व बोकले रहठ । अस्टिम्की टिहुवारके फेन विशेष महत्व बा ।

१. थारू सब महिला दिदीबहिनियाँहुक्रे सामूहिक बरट बैठ्ना हुइल ओरसे समाजमे एकता कायम करठ ।
२. डाडुभैया डिडीबहिनियँन बीच प्रगाढ सम्वन्ध बनाइठ ।
३. प्राकृतिक रुपमे टमान जीवजन्तुके पूजापाठ कैना यी टिहुवारमे प्रकृतिसंग निकट सम्वन्ध रहल बुझाइठ ।
४. अस्टिम्कीके गीतमे यी ब्रम्हाण्डके सृष्टि हुइलेसे लेके सबसे पहिले का–का के सिर्जना हुइल कना आख्यानसे उ सिर्जित प्रकृतिके पूजा होके प्रकृति पुजक जातके रुपमे चिन्हाइठ ।
५. गाउँभरिक महिला लावा कपरा सजढजके साथ प्रत्येकके हाँठ हाँठमे डियासहितके टठियासे साँझके दृश्य ज्योर्तिमय बनाइठ । यी गाउँमे रौनकता बह्राइठ ।
६. बरट बैठलबाड मनोकांक्षा पूरा हुइना जनविश्वास रहल ओरसे भक्तिपूर्वक मनैना यी टिहुवारसे प्रकृति ओ भगवानप्रतिके आस्था जगैले बा ।

ओरौनि
टिहुवारके अपन मूल्य मान्यता ओ महत्व रहठ । थारू जातिमे विधिवत रुपमे महिला किल निराहार बरट बैठ्ना यी टिहसवार काल्हके दिनमे जोन मेरिक मनाजाए । आझकल्ह सामान्य औपचारिकतामे सीमित हुइल पागैल बा । गाउँभरिक महिलाहुक्रे एक्के ठाउँमे जम्मा हुके मनैना यी टिहसवारमे अझकल्ह एक्केलि अपन कोठामे कृष्णके फोटु नानके पूजापाठ कैना प्रवृति बह्रल ओरसे सामाजिकतामे कमि महसुस करे सेकजाइ । कोइ धनीमानी व्यक्तिके टडरभरकसे समाजमे असर पुगल पाजाइठ । ओहे कारण परम्परासे चलल अपन मौलिक परम्पराहे संरक्षण करटि मौलिकपनहे आत्मसात कैके मनैना जरुरी बा ।

सन्दर्भ सूची
कोपिला छविलाल हमार संस्कृति (२०७१) आदिवासी जनजाति राष्ट्रिय प्रतिष्ठान जावलाखेल काठमाडौं ।
चौधरी पन्ना मानबहादुर थारु सख्या नाच गीत (२०७०) युनिक नेपाल बर्दिया ।
डा. दहित गोपाल थारू संस्कृतिको परिचय (२०७७) युनिक नेपाल बर्दिया ।
डा.सर्वहारी कृष्णराज बिहान (२०५८) थारू युवा विद्यार्थी परिवार, काठमाडौं ।
शत्रुघन चौधरी अस्टिम्की गीत (२०७४) आदिवासी जनजाति राष्ट्रिय प्रतिष्ठान जावलाखेल काठमाडौं ।

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’
वीरेन्द्रनगर, सुर्खेत

अस्टिम्की टिहुवार ओ अस्टिम्की चित्रकलाके महत्व

मानबहादुर चौधरी ‘पन्ना’