कंचनपुरके थारु साहित्यमे लावा बात बट्वाइबेर

सागर कुस्मी ‘संगत’
२९ भाद्र २०७८, मंगलवार
कंचनपुरके थारु साहित्यमे लावा बात बट्वाइबेर

कंचनपुरके थारु साहित्यमे लावा बात बट्वाइबेर

कंचनपुरके थारु साहित्यके इतिहास ओट्रा लम्मा नैहो । अनुसन्धान करेबेर शुक्लाफाँटा–७ झण्डाबोझीके हिमाली चौधरीक् कृष्ण अस्टिम्किक् गीत–२०६१ कंचनपुरके पहिल पोस्टा ठहरठ् ।

२०७५ साल वैशाखमे अस्रा गजल संग्रह निकारके अपन साहित्यकारितामे पहिचान बनैटि पुनर्वास–२ अमरहिया, कंचनपुरके संगम चौधरी फेंन डोस्रे अपन लावा घर कथा संग्रह लेके ठहर््याइल बटैं । द्वापर युगमे राम लक्ष्मण ओ सीता १२ बरस बनिवाँस खान्डके अपन दरबार लौटल रहिंट । ओस्टके कहेहस कंचनपुरमे फेंन डुस्रा कथा संग्रह निक्रक लग १५ बरस बटिया लागे परल ।

संगम चौधरीसे पहिले २०६२ सालमे शुक्लाफाँटा–३ जोन्हाँपुरके कल्पना चौधरीक् उज्रल घर डुवार कथा संग्रह प्रकाशित हुइल बा । कंचपुरके थारु साहित्यिक इतिहास खिट्कोर्ना हो कलेसे पुनर्वास–२ मोतिबस्तीक् अशोक चौधरीक् मनके आवाज गजल संग्रह–२०७० छपल बिल्गाइठ । ओस्टके कृष्णपुर–६ सिंहपुरके जोगराज चौधरीक् अस्टिम्किक् गीत–२०७३ फेंन छपल बा ।

कंचनपुरसे अभिनसम एक्केठो किल थारु भासक् सुमिरन बार्सिक पत्रिका सागर कुस्मीके प्रकासन ओ सम्पादनमे आइल आइल बा । थारु भासा साहित्य जोर डेटि आइल इ पत्रिका फेन घुस्करिया कर्टि बा । इ खुसिक बात हो कि कंचनपुरसे फेन पत्रिका निकरल बा कना कंचनपुर बासी गर्व करे सेक्ना अवस्था बा ।

गजल, मुक्तक विधामे युवा स्रस्टा फाटफुट रुपमे कलम चलैलेसे फेंन अभिन आख्यान विधा ओर ओट्रा डटल नैबिल्गैठैं । । २०७४ सालमे सिर्जल मुक्तक संग्रह निकारके अपन थारु भाषा साहित्यहे सेवा कर्टि आइल कृष्णपुर–६ सिंहपुरके साफी चौधरी निबन्ध लेखनमे जमके कलम चलैटी आइल बटि । हुँकार निबन्ध पहर्के आस करे सेक्जाइ कि अइना दिनमे कुछ महिला लेखक लोग फेंन जरुर जन्महि ।

संगम चौधरीक् यि लावा घर कथा संग्रह हुँकार डुस्रा कृति हुइन । एक्के सालमे २ ठो कृति निकर्ना बहुट कर्रा काम हो । साहित्य लिख्ना महा साँसट हो । असिन अवस्थामे फेंन संगम अपन कलमहे डौराइठ डेख्के खुशी लागल बा । थारु साहित्यमे एकठो बख्खारी बान्ढ जाइटा ।

यि कथा संग्रहमे १२ ठो कथा गुँठल बा । जहाँ जिन्गिक् हर मेरिक दुःख, पिरा, व्यथाके चित्र खिंचल बा । गाउँ घरक् समस्या, गरिबके कारण पाइल दुःख बेदना समेटल बा । यि कथा संग्रहमे १२ ठो कथा मन्से लावा घर शीर्षक कथा पारिवारीक कथा हो । जिन्गी गुजारक् लाग हरेक मेर्के सपना रठिन परिवारके सदस्यन्के, जिउ ज्यान डेके फेंन बाधा समस्या अइटि रठिन । गीता ओ विपिनके भूमिकाके रोल बा लावा घर कथा भिट्टरके पात्र लोगनके ।

ओस्टके अच्कचरे सपनामे हरेक मनैन्के कुछ करुँ कना चाहना रहठ । कुछ मजा काम कैके डेखाउँ कना चाहना रहठ । कुछ मजा काम कैके डेखाउँ कना सोनियाके इच्छा रठिस लेकिन घरक् मनै साथ नैडेके ओकर सारा सपना चकनाचुर होके माटिमे मिल्जैठिस ।

दिनेश, विजय ओ रबिनाहे पात्र बनाके सिर्जाइल बिडाइ कथामे लवन्डी लवन्डाके प्रेम कहानी हो । अपन ठरुवाहे छोर्के डोसर ठरुवाहे लेके पाछे जाके दुःख भोगल कथा बा । रगतके रंग कथामे मैननके भावना बुझके प्रेम कथा बनल बा । यम्ने काजल ओ अविनाशके रोल बा । धनी गरिब, धर्म, जातपात नैहेर्के मानवीय गुण डर्साइल बा । ओस्टके छाइ कथामे समाजमे नारी फेंन पुरुष सरह होके काम करे सेक्ठैं कना चित्रण कैल बा ।

भोज कथामे लवन्डा लवन्डी प्रेम कर्ठैं मने पाछे जाके लवन्डा लवन्डीके सम्बन्ध टुटल बिल्गाइठ यम्ने रमेश ओ रेश्माके गार्ह प्रेम कहानी बा । ओस्टके पटुहिया कथामे समाजमे रहल रीतिरिवाज अन्सार भोजमे माँगर गाइल बा । जौन यि कथाके मजा पक्ष हो । अस्टके यम्ने ठरुवा बिट्लो पर पटुहिया अपन सास ससुरवाहे छावा होके घर सम्हाँरल कथा बा । यम्ने सन्ध्या पटुहिया बन्के अपन भूमिका निभैले बटि ।

अस्टके ठकौनी कथामे पुरान बात फेंन खिट्कोरल बा । पहिलेक जबानामे लर्का जन्मनासे पहिले ठकौनी खाडारिंट । लवन्डिक इच्छा बिना भोज कैके अपन छाइ गुमैलक घटना बा । ओस्टके डाइ कथामे २ ठो टुवर लर्कनके कहानी बा । डाइ परलोक हुइल ओरसे डाडु ओ बाबुके कथा बा । ओस्टके बिस्राइल डगर कथामे एकठो लवन्डी अपन जिन्गीक् डगर भुलाके दुःख पाइल कथा बा ।

अर्पण कथाके पात्र अपन जन्माइल बच्चाहे रातके लवन्डक घरक् अंगनामे छोर्के गैल कहानी रचल बा । ओस्टके अन्तिम सफरमे डेउखरसे छारा कैके बुह्रान आके भुँखे प्यासे जिन्गी बिटाके फेंन घर परिवार मजासे बैठल बात डर्साइल बा ।

अट्रा मेहनत कैके लिखल यि कथा छाइ डाइ पटुहिया भोज कथा अक्के अक्केहस लागठ । सक्कु कथा जोर्लेसे एकठो उपन्यास बन्ना मेर्के कथा समेट गैल बा यम्ने । अभिन फेंन कुछ स्रस्टा लोगनके अध्ययनके कमिसे खोजलहस कथा आइ नैसेकठो । हमार समाजमे गाउँ घरमे अभिन शिक्षाके चेतनाके कमि बा । बेरोजगार ढेर बा । अइसिन कथाहे सिमोट्ना जिम्मा आइल बा आब । अपन डाइ बाबा कैसिक पह्रैलैं, कैसिक बहै्रलै कथा आइठ कलेसे आकुर डमडार हुइना रहे । भ्रष्टाचार, अन्याय, दमन, शोषण सहके कमैयाँ, कम्लहरीके कथा पेंmन लिख्ना कथाकारके कन्ढम आइल बा । जेडासे प्रेम कथा सिमोटल यि संग्रह पठनीय टे बा बा ओकर संगसंगे अभिन थारु समुदायमे घटल घटनाके कथा कमे आइटा ।

लोक साहित्यमे धनी थारु समुदायके भिट्टर रहल बट्कुही खोज अनुसन्धान कैके लिखित रुपमे ढैना जरुरी बा । समयके बावजुद फेंन यि पंक्तिकारहे भूमिका लिख्ना मौका डेलकमे कथाकार संगम चौधरीहे सैगर सम्झना बा । अझकल लगटार रुपमे थारु लोक संस्कृतिमे कलम चलैटि आइल रविता चौधरीसे फेन अइना दिनमे लावा कृति आइ कना आस करे सेक्जाइ । जैटि जैटि अइना दिनमे यिहिसे चारगुणा मेहनत कैके टिस्रा कृति हलि निकारिंट सैगर शुभकामना ।
सागर कुस्मी ‘संगत’

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