थारु साहित्यके डगर

कृष्णराज सर्वहारी
५ आश्विन २०७८, मंगलवार
थारु साहित्यके डगर

थारु साहित्यके डगर

थारुभाषा नेपालके चौथा भारी भाषा हो । २०२८ सालमे आधुनिक कविता, गीत, कथा, लेख समेटल ‘गोचाली’ पत्रिकाके उदय हुइल । यी साहित्यमार्फत् पञ्चायत व्यवस्थाविरुद्ध आन्दोलनके हुँकार करल । यीहे थारुभाषाके पहिल पत्रिका हो । यद्यपि, गोचाली प्रकाशन हुइनासे आघे २००७ सालमे बढ्वा थारुके ‘बढक्क जोर्नी’ पुस्तक प्रकाशित हुइल डेखजाइठ । ओस्टके, ०११ सालमे जीवराज आचार्यके ‘हम्र ओ हमार बन्वा’ पुस्तक प्रकाशित पाजाइठ । यी पुस्तक वनसम्बन्धी महत्वबारे कविता हो कलेसे बढक्क जोर्नी गीतसंग्रह हो ।

एकरबाड चौधरी रूपलाल महतो ओ बद्रीनाथ योगीके संकलन ०१६ सालमे प्रकाशित दंगीशरण कथा, बर्कीमार, गुरुबाबक् जल्मौटी थारु लोकसाहित्यके संकलनके घुरघुट उघारल । चितवनसे जित बहान कथा २०१६ सालमे तथा रामप्रसाद रायके थरुहट के बउवा और बहुरिया गीति नाटक ०१९ सालमे प्रकाशित हुइल । थारु कल्याणकारिणी सभाले सखिया ०२४, प्रफुल्लकुमार सिंह मौन थारु लोकगीतके संकलन ०२५ प्रकाशन कैलैं । अइसिक गोचाली पत्रिका प्रकाशन हुइनासे आघे लोकगीत, लोककाव्य, नाटकके संकलन प्रकाशित हुइल डेख्जाइठ । यी आलेखमे थारु साहित्यके लेखनके अवस्था का कैसिन बा ? आख्यान, कविता, नाटक आदि विधामे का–कैसिन हइटा ? एकर बारेम चर्चा हुइना आवश्यक बा ।


उपन्यास
आख्यानके महत्वपूर्ण विधा उपन्यासमे फेन थारु समुदाय घुसकरिया बरटि बा । ०७० सम थारुभाषाके १४ उपन्यास प्रकाशित बा । खास कैके कैलालीके स्रस्टा उपन्यास लेखनमे आघे बटैं । तेजनारायण पञ्जियार ०४९ मे बुद्धके जीवनी ‘शाक्य बुद्ध’ लिख्लैं । थारुभाषाके पहिल मौलिक उपन्यास भर कृष्णराज सर्वहारीके फुटल करम (०५५) हो । मनिराम चौधरीके बिधवा (०५७) थारुभाषाके डोसर उपन्यास हो । ओस्टके, छविलाल कोपिलाके मुक्तिक खोज (०५९) थारुभाषाके टिसर उपन्यास हो । लम्मा कथाजस्टे लग्ना २०–२२ पृष्ठके यी उपन्यासमे उपन्यासकार लिखे पर्ना बहुट बाट छुटैले बटैं । उपन्यासमे पैना तत्व फेन बहुट कम बा ।

०६२ मे थारुभाषाक दुई उपन्यास प्रकाशित हुइल । हरि आसमा महतोके ‘आत्मा भितरक गाथा भेलई जिन्गिक काथा’ ओ आदर्श बान्धबके चमेलिया । महतो अपन लघु उपन्यासमे गजलसमेत समावेश कैके पुस्तकहे खिचडी बनैले बटैं । कैलालीके भोजराज चौधरीके उपन्यास तिरिया जलम प्रकाशित बा ०६३ मे । यमने पात्रमार्फत् थारु समुदायका सब टिहसवार बारेम चर्चा कैना प्रयास कैल बा । कैलालीके शर्मिला चौधरी ‘सृष्टि’के उपन्यास ‘दुःखके हल्कोरा’ ०६४ मे प्रकाशित बा । थारु महिलासे लिखल यी पहिल उपन्यास हो ।

कृष्णराज सर्वहारी नेपाली भाषामे लिखल बसाइँ उपन्यासहे थारुभाषामे अनुवाद कैलैं, छारा शीर्षक डेके । उपन्यासमार्फत् लेखक अपन समुदायके सकारात्मक, नकारात्मक बखान करे सेक्ठैं मने उपन्यासकारके संख्या पर्याप्त रूपमे ठपल नैहो । समसामयिक कथावस्तु आख्यानमे फेन आइ नैसेक्ले हो ।

कथा
थारुभाषामे लिखल कथाके इतिहास ओट्रा पुरान नैहो । चितवनसे ०१६ मे धार्मिक पुस्तक ‘जित वाहन कथा’ प्रकाशित हुइल भेटाजाइठ । अइसिके धार्मिक कथासे थारुभाषाके लेखन परम्पराके सुरुवात हुइल डेख्जाइठ । गोचाली ओ ०३३ मे थारु संस्कृति पत्रिका प्रकाशन हुइ लागल टबसे ओम्ने कथा छप्ना क्रम सुरु हुइल डेख्जाइठ । यद्यपि, ०४६ सालसे प्रकाशित ‘बिहान’ पत्रिकामे श्रीपति चौधरीके कुछ कथा छपल बा, जोन कथा ०२२ से ०२५ सममे रचना कैगैल कहल बा ।

ओसिक टे ०३२ सालमे बाराके हृदयनारायण चौधरीके ‘कहली, सुनली, बुझली’ थारुभाषामे कथासंग्रह प्रकाशित बा । यीहे जो थारुभाषाके पहिल कथासंग्रह हो । अइसिक आधुनिक थारुभाषा कथाके जनक बाराके हृदयनारायण चौधरी मानजैठैं । ‘कहली, सुनली, बुझली’ कथासंग्रहके पाँच कथाके बीचबीचमे कविताके पंक्ति फेन बा । जिहिसे कथाकारके कवि व्यक्तित्व झल्कइले बा । प्रस्तुत कथासंग्रहमे व्यंग्य कविता फेन समावेश बा । यी कथा तत्कालीन थारु समाजके अवस्था खिडोरठ । कथा ओ ओकर भिट्टरके कवितांश थारु साहित्य आधुनिकता ओर ढरकल डेखाइठ । डोसर कथासंग्रह प्रकाशित हुइक लाग २३ बरस अस्रा लागे परल । थारुभाषाके डोसर कथासंग्रह हो लक्ष्मण किशोर जोगेठ्वा ‘परदेशी’के इज्जतके दाम (२०५५) । २०५५ फागुन २८ से ३० सम उदयपुरके हडियामे थाकसको स्वर्ण जयन्तीके अवसरमे बहुट पुस्तक प्रकाशित हुइल । इहे क्रममे छातापिपरा–४ बाराके मधुसुदन चौधरी अपन नाउँके शीर्षक ढारके मधु कथासंग्रह (२०५५) प्रकाशन कैलैं । १० कथा संकलित मधु कथासंग्रहके कुछ कथामे कविता फेन स्थान पैले बा ।

बाराके परशुराम चौधरीके कथासंग्रह प्रकाशित बा, चमत्कार (२०५६) । जेमने मध्यमखालके कथा बा । कैलालीके मनिराम चौधरी फेनन दुईठो कथासंग्रह लेके डेखा परल बटैं । हुँकार कथासंग्रह हुइन रसाइल करम (२०५९) ओ दुखियारी बयिया (२०६१) । कथाके सामान्य मान्यताहे त्यागके दुखियारी बगियामे ४६ पृष्ठके एउठो कथा समावेश बा ।
थारुभाषाके डोसर सशक्त हस्ताक्षर हुइँट् बर्दियाके सन्तराम धारकटुवा थारु । हुँकार हमार जुनी (२०६१) प्रकाशित बा । जेमे ६ कथा संग्रहित बा । एमने प्रयुक्त विम्बसे थारु साहित्यमे उत्तर आधुनिकताके छनक डेहल बा । यी बाहेक फुटकर रूपमे हुँकार प्रशस्त कथा टिट्कल बटिन । हुँकार कथा अनुवाद कैके नेपाली भाषामे प्रकाशन करे सेक्लेसे उहाँ राष्ट्रिय रूपमे चर्चित हुइ सेक्ना कथाकार हुइँट् ।

कैलाली थारु साहित्यके लाग मल्गर क्षेत्र हो । यहाँके हिरालाल चौधरी दुःखके भौंरी (२०६३) केरनी ओजरिया (२०६५) ओ मुकेश टेंर्रा वास्तविके लालमुरै (२०६४) कथासंग्रह प्रकाशित हुइल बा । चौधरीसे टेंर्राके कथा ओजनडार बा । कंचनपुरके कल्पना चौधरीके उजरल घर दुवार (२०६२) कथासंग्रह प्रकाशित बा । कुछ पत्रपत्रिका कथा विशेषांक प्रकाशित कैलेसेफेन टमान कथाकारके कथा संग्रहके रूपमे एक मात्र संग्रह थारु भाषक् प्रतिनिधि कथा–१ (२०६८) प्रकाशित बा, जेकर सम्पादन शत्रुघन चौधरी कैले बटैं ।

पेसासे शिक्षक रहल उत्तरगंगा–७ सुर्खेतक मानबहादुर ‘पन्ना’के ककनडरान छोटकी (२०७०) कथासंग्रह प्रकाशित बा । हालसम थारु कथासंग्रहके एक दर्जन पुस्तक आइल बा । साहित्यके विकासमे मातृभाषाके रचनाके अनुवाद प्रकाशनके ओट्रे महत्व रहल बा । बिहान पत्रिका २०६० मे बट्कुही लोककथा विशेषांक प्रकाशन कैले बा । थारु समुदायके लोककथाओर संग्रहके रूपमे कृष्णराज सर्वहारीके संकलनमे मामा–भान्जा (२०६०) ओ थारु लोककथा–१ (२०६७) पुस्तक प्रकाशनमे आइल बा । थारु लोककथा– १ साझा प्रकाशनसे २०६७ के लोकसाहित्य पुरस्कार समेत पैले बा । यद्यपि, पुस्तक नेपाली भाषामे बा । ओस्टके थारु लोककथा संग्रहमे सहयोग समाज नेपाल दाङ थारु मातृभाषामे बट्कुही लोककथासंग्रह (२०६४) प्रकाशन कैले बा ।

कृष्णराज सर्वहारीके बालकथासंग्रह सुुख्ली (२०६२) थारुभाषाके एकठो किल बालकथासंग्रह हो । थारुभाषाके अन्य कथाकारमे मंगल थारु, श्रीपती चौधरी, सुशील चौधरी, सोम डेमनडौरा, देवराज अमित, धर्मराज चौधरी, ओमप्रकाश गोइंजिहार, नरेश लालकुसम्या, प्रसादु थारु, लक्की चौधरी, सागर कुस्मी, संगम चौधरी, साफी चौधरी आदि हुइँट् । तीसके दशकमे लिखल कथा ओ हाल सत्तरीके दशकमे आइट्सम फेन थारु साहित्यके कथा लेखनके शैलीमे खासे फरक आइ नैसेक्ले हो । लावा डग्गर त्रैमासिक (२०६९, पूर्णांक १३) ओ बिहान वार्षिक (२०७०, पूर्णांक १८) मे क्रमशः १६ ओ ८ जाने कथाकारके एक एक थान कथा समावेश कैके कथा विशेषांक प्रकाशन कैल बा । मने, डुनु विशेषांकमे कथाके बारेम् समालोचना नैहो । अइसिन विशेषांक नियमित प्रकाशन हुइना जरुरी बा ।

कविता
थारुभाषाके पहिल कवितासंग्रहके फेन यकिन हुइ सेकल नैहो । मने, २०४५ सालमे प्रकाशित हृदयनारायण चौधरीके ‘मेहमान’ थारुभाषाके पहिल कवितासंग्रह मान्गैल बा । कवि हृदयनारायणके मेहमान बाहेक ‘चतुरंगी फूल’ (२०५६) कविता संग्रह ओ ‘प्रभात रोशनी’ (२०५९) लघु खण्डकाव्य प्रकाशित बा । चतुरंगी फूल कविता पश्चिमी, मध्य, पूर्वी ओ मध्य पश्चिमी भाषामे प्रकाशित कवितासंग्रह हो । सियाराम चौधरीके ‘पोह फाइट गैले’ (२०४७) ओ ‘हमर गाम हमर बस्ती’ (२०५०) कवितासंग्रह प्रकाशित बा । संख्यात्मक रूपमे कमे क्रमश १९ ओ १८ ठो कविता समाविष्ट सियारामके कविता लेखनशैली ओ भावपक्ष हेरलेसे अब्बल दर्जाके बा । ओस्टके कैलालीके रेशमलाल चौधरी अपन पहिल पुस्तकाकार कृति ‘एकथो बिरहीन कथा’ (२०५३) कवितासंग्रह प्रकाशन हुइल । मधुसुदन चौधरीके ‘मधु’ (२०५५) कवितासंग्रहमे कुछ बाल कविता फेन भेटाइठ ।

कवयित्री शान्ति चौधरी थारुके बेटी (२०५४), ‘गाँवके पहिचान’ (२०५५) लगायत कवितासंग्रह प्रकाशित बा । मने, प्रायः संग्रहमे ८÷ १० वटा कवितासंगे लेख निबन्ध, पुस्तक पत्रिकाके समाचार समावेश कैलक् ओरसे विशुद्ध थारु कवितासंग्रह माने नैसेक्जाइ । कविताके अन्य कृतिमे कविराम थारुके सैहदान (२०५२) मानबहादुर चौधरी पन्नाके ढुकढुकी (२०५७), बालगोबिन्द चौधरी ओ सुमन चौधरीके बैँशालु जोवन (२०५७) हो । ढुकढुकी ओ बैँशालु जोवनमे मुक्तक फेन समावेश हुइल बा ।

ओस्टके अन्य कविता कृतिमे मनिराम चौधरीका ‘हिमालके मुस्कान’ (२०५८) प्रेमराज चौधरीके ‘कहतुँ मैं’ (२०६०), सुरेश चौधरीके ‘तुहिन’ (२०६१), जीतबहादुर चौधरी ‘ट्रासन’के यी जीतके हटल कविता कविता संग्रह (२०६१), अर्जुन दहितके ‘परिचय’ (२०६२), प्रेमलाल दहितको ‘टुटल झोप्री’ (२०६२), रामबहादुर बखरियाके ‘मुटुक धड्कन’ (२०६२) हो । यी सब कविता संग्रहमे प्रेम प्रणयके बखान कैल बा । यी कविता संरचना ओ भाव गाम्भीर्यताके हिसावमे कमजोर डेखाइठ । सन्तराम धारकटुवा थारुके ‘छिटकल भावना’ (२०६२) कवितासंग्रह भर हालसम प्रकाशित अब्बल दर्जाके कविता कृति हो । हुँकार कविता विषयवस्तु, भाव, शैली ओ कलाकौशलता ध्यान पुगल बटिन । ओस्टके प्रेमलाल दहितके टुटल झोपडी कवितासंग्रह (२०६१), बापसे पुत ज्ञानी फाँडाले बझाइ पानी कवितासंग्रह (२०६२), प्रकाशित बा । मुकेश टेंर्राके फूला (२०६३) कवितासंग्रह थारु, राना थारु ओ नेपाली तीन ठो भाषामे प्रकाशित बा । श्रीराम चौधरीके चिट्िकन (२०६४), कैलालीके रामलखन चौधरीके छलमल्की (२०६५), रामलखन चौधरी, मनबहादुर चौधरीके विश्व शान्ति (२०६७), लक्की चौधरीके नेन्धर (२०७१), सुशील चौधरीके नेपाली ओ थारुभाषामे बिरहुल बसिया (२०७२) प्रकाशित बा । शान्ति चौधरीके कृतिहे अपवाद मन्लेसे हालसम अढाइ दर्जनसम कवितासंग्रह प्रकाशित डेखाइठ ।

खण्डकाव्य, महाकाव्य
रुपन्देहीके बमबहादुर थारुके ‘ई जिन्गी’ (२०५५) खण्डकाव्य थारुभाषाके पहिल खण्डकाव्य हो । यी खण्डकाव्यमे थारु मौलिक शब्दके भण्डार छ । यी कृतिमे थारुभाषाके अत्यन्त प्राचीन ओ ठेट शब्दके प्रयोग हुइल बा । २०६१ मे मानबहादुर चौधरी पन्नाके ‘किसानके जिन्दगी ‘ खण्डकाव्य प्रकाशित बा । कैलालीके शर्मिला चौधरी ‘सृष्टि’ मनके फूला (२०६२) खण्डकाव्यमार्फत् नारी मनके संवेदना लिखले बटि । हुँकार पहिल गहकिला वजनदार कृति हुइना विरूवाके चिल्लो पातके उदाहरण डेले बा ।

पचासके दशकमे जोखन रत्गैया ‘भुत्वा’ महाकाव्य लिखल बटाजाइठ । हृदयनारायण चौधरी बुद्धके जीवनीमे आधारित ‘ललित बिस्तर’ (२०६८) महाकाव्यके थारुमे अनुवाद कैले बटैं छन् । हृदयनारायण चौधरीके डोसर महाकाव्य बन्हन फेन प्रकाशित बा ।

मुक्तक, हाइकु ओ तान्का
पहिल मुक्तक संग्रह कृष्णराज सर्वहारीके ‘दोसर घर जाईबेर’ (२०५६) हो । कैलालीके स्रष्टा टिकाराम चौधरीके आग्रह (२०६३) ओ सागर कुश्मी संगतके आँशके सागर (२०६९), सुन्दर चौधरीके प्रकृतिके अनुराग हमार पहुरा (मुक्तकसंग्रह–२०७०), दाङ डेउखरके छविलाल कोपिला, गुरुप्रसाद कुमाल ‘बुलबुल’ ओ रामप्रकाश चौधरी ‘अन्धकार’ के नेपाली ओ थारुभाषामे संयुक्त मुक्तक संग्रह ‘समयका डोबहरू’ (२०७१) प्रकाशित बा । हिरालाल सत्गौवाँके पैनस्टोपी (मुक्तकसंग्रह २०७१), टमान कवि गोष्ठी, रेडियो कार्यक्रम अथवा छापा सञ्चार माध्यममे ६०–७० दशकहे ‘मुक्तक–गजल’ दशक कहे सेक्ना अवस्था हुइलेसेफेन संग्रहके रूपमे भर कमे प्रकाशित डेख्जाइठ । फुटकर रुपमे भर एकर वर्चस्व रहल बा ।

थारु साहित्यमे हाइकु ओ तान्का विधा खासे प्रभाव जमाइ नैसेकल । आंशिक रूपमे कुछ पत्रिकाबाहेक साहित्यिक कार्यक्रममे समेत वाचन करल नैडेख्जाइठ । सर्वहारी २०५९ सालमे थारु ओ नेपाली डुनु भाषामे ‘समयका उच्छ्वासहरू’ हाइकुसंग्रह प्रकाशित कैलैं । ओसटके, तुलाराम चौधरी ‘सनम’के ‘तुहिन उपहार’ (२०६१) ओ छपिलाल चौधरीके ओजरिया रातम (२०६३) हवाइ हाइकुसंग्रह प्रकाशित बा । ओकर बाड अभिनसम कौनो हाइकु संग्रहित रूपमे आइ नैसेकले हो । दिप लाइफ कियर गोजी आकारमे ‘तुँहार लग फूला’ (२०६३) नामक थारुमे नौलो बिधा तान्का निकरले बटैं ।

गजल
थारु साहित्यमे गजल विधा संख्यात्मक हिसाबसे सबसे ढेर पाजाइठ । थारुभाषाके पहिल गजलसंग्रह जोखन रत्गैंयाके ‘चोराइल मन’ (२०५७) हो । ओस्टके, अन्य गजल संग्रहमे भुवन चौधरीके ‘आछत’ (२०६१), लक्की चौधरीके ‘सहीदान’ (२०६१), छविलाल कोपिलाके ‘भौगर’ (२०६१) हो । भौगर नेपाली ओ थारुभाषा डुनु भाषामे बा । कोपिलाके थारु बाल गजलसंग्रह कहिले फूल्छ ऊ (२०६३) फेन नेपाली ओ थारुभाषा डुनु भाषामे बा । लक्कीके अन्तर्भाव (गजलसंग्रह २०६३) अन्तर्भाव फेन नेपाली ओ थारुभाषा डुनुमे प्रकाशित बा । गुर्बाबा प्रकाशन प्रालिके अग्रासन मासिक (२०६२ पूर्णांक ७) हे गजल विशेषांकके रूपमे ‘कैहदेऊ गुर्बाबा संग्रह’ कहिके प्रकाशित कैल बा । थारुभाषा तथा साहित्य उत्थान समूहके लावा लौझी त्रैमासिक (२०६५ अंक–४) गजल विशेषांकमे २९ जे गजलकारके गजल समेटल बा । लाहुराम चौधरी ‘जहर’के फुलरिया (गजलसंग्रह २०६६), सागर कश्मी संगतके हस्ताक्षर (२०६८), फुटल पोक्री (२०६८), खुशीराम उमंग चौधरीके विक्षिप्त मुटु (२०६९) के ५२ थान गजलमे १२ वटा किल थारुभाषामे बा । मोतीराम चौधरी ‘रत्न’ के मनके बोझा (२०७०), रामचरण चौधरी ‘एकल यात्री’के मोर टुटल झोपरी (२०७०), चन्द्रप्रसाद चौधरीके गजल माला (२०७०), कंचनपुरका अशोक चौधरीके मनके आवाज (२०७०) जिल्लागत दृष्टिकोणसे सम्भवतः हुँकार यी संग्रह जो कंचनपुरसे प्रकाशित हुइल थारुभाषाके कृतिमध्ये पहिल हो, रविना चौधरी रब्बुके ओंरी (२०७१)हे थारु महिला गजलकारसे लिखित पहिल प्रकाशित कृति मानगैल बा । जंग्रार साहित्यिक बखेरी नेपालगञ्जके प्रकाशन रहल डिउली (२०७१), जंग्रारके मुम्बई शाखाके जेउनास (२०७१), ठुम्रार साहित्यिक शृंखला काठमाडौँके पहिल प्रकाशन परगा (२०७२) मे फेन टमान शृंखलामे वाचन करल गजल संयुक्तरूपमे प्रकाशित हुइल बा । २०७२ सालमे पस्नक पन्ह्वा संयुक्त गजल, सीता थारु निश्चलके परगोह्नी, पुनाराम चौधरी (कर्याबरिक्का) के अँख्वा गजलसंग्रह प्रकाशन हुइल । २०७३ मे दाङके बुद्धिराम चौधरीके चिन्हाँरी ओ महेश चौधरी एमके कुशुम्याके मैंयक् बौछार गजलसंग्रह प्रकाशन हुइल बा । थारुभाषामे भिट्रल गजलमे रदिफ ओ काफियामे नेपाली भाषाके प्रभाव ढेर भेटाजाइठ । फुटकर रूपमे कविता, गजल लिखुइयनके तालिका लम्मा बा ।

थारु साहित्यमे गीत लेखनके अवस्था कमजोर बा । बिहानके, दिनके, रातके अलग अलग गीत गैलेसेफेन लोकगीतके संकलन समेत बहुट कम हुयल बा । जस बर्दियाके ‘लौव चलन– भाग १ (२०५७) ओ भाग २ (२०६०) मे लोकगीत शैलीमे आधुनिक गीतके प्रस्तुति बा । छविलाल कोपिलाके सम्पादनमे थारु लोकगीत (२०७२) प्रकाशित बा । गीतके पुस्तक संकलनसंगे ४ दर्जनसे ढेर थारुगीति क्यासेटके संकलन बजारमे आक्ष्ल बा । थारुभाषामे ८५ ठो चलचित्र बनल रलेसेफेन लोकगीत भर महाँ कम समेटल बा ।

नाटक
थारु साहित्यमे नाटक प्रकाशन हो मञ्चनके दृष्टिसे कमजोर डेखाइठ । रामप्रसाद राय २००७ सालमे थारु कल्याणकारिणी सभाके जनचेतना अभियान अन्तर्गत खास कैके पूर्वी थरुहटमे नाटक मञ्चन केले रहिंट । हुँकार थरुहटके बउआ और बुहरिया (२०१९) पुस्तकहे गीति नाटक कैह्गैल बा ।

बसाइसराइके विषयवस्तु समटले महेश चौधरीके छारा (२०२८) नाटक प्रकाशित हुयलेसे फेन हाल यी अप्राप्य बा । पुनर्प्रकाशन करक लाग एक प्रति फेन नैपाइल स्वयं नाटककार बटैठैं । छारा दाङके टमान विद्यालयमे मञ्चन कैगैल रहे । राजधानीमे थारु समुदायके मुद्दा केन्द्रित नाटक फेन फाटफुट रुपमे मञ्चन हुयल बा ।

राजधानीमे स्वान संस्थाके पहलमे कमलरी (२०६१) नाटक गुरुकुल बानेश्वरमे करिब २ हप्ता मञ्चन ह्यल रहे । ओस्टके शिल्पी काठमाडौँ, शान्तिके लाग युवा सञ्जाल बर्दिया तथा कपिलवस्तु नाट्य समूह, तौलिहवाके संयुक्त आयोजनामे २०७० बैशाख ८ गते त्रिवि कीर्तिपुरमे ‘दहितान ढेंकी’ नाटक मञ्चन कैगैल रहे । डुनु नाटकमे भाषा फेन थारु जो रहे ।

निबन्ध
थारु साहित्यमे कौनो कृतिमे एकदुइठो निबन्ध परल बा, मने निबन्धके कौनो सिंगल कृति प्रकाशित हुइल नैडेख्जाइठ । लक्की चौधरीले ‘तिहुवार’ (२०६१), मोर पहुरा (२०७०), मनिराम चौधरी ‘हरबड्डा’ (२०६२) ओ भुलाई चौधरीके ‘थारु सस्ंंकृति’ (२०६१) निबन्धके झल्को डेहठ । यद्यपि, भुलाईके संग्रहमे नेपाली लेखसमेत समेटल बा । तिहुवारमे थारु टरटिहुवार बारेम् जानकारी डेहल बा कलेसे मोर पहुरामे नेपाली पत्रपत्रिकामे प्रकाशित लेखहे थारुमे अनुवाद कैल बा । अइसिक विशुद्ध साहित्यिक निबन्धसंग्रह अभिन फेन थारु सहित्यमे प्रकाशन हुइ नैसेकल हो ।

बिसौनी
थारु साहित्यमे कथा ओ उपन्यास विधामे अभिन फेन दर्जनके हाराहारीमे किल कृति डेख्जाइठ । मने, आख्यानमे समयअनुसारके चिन्तनके अभाव डेख्जाइठ । कमैयाँ मुक्तिके घोषणा हुइल डेढ दशक नाँघ सेकल, मने आख्यानमे कमैयाँ पात्र जमिनदारसे दुःख पाइल पुराने प्रसंग भेटाजाइठ । एक दशकके जनयुद्धमे हजाराँै थारु बलिदानी डेलेसे फेन ओहे विषय केन्द्रित आख्यानके अभाव बा । साहित्यकार सुशील चौधरीके प्रश्न बा– थारु स्रष्टा आब युगके माग अनसार कलम चलाइ सुरु करे नैपरि टे ? सम्मानपूर्ण जीवनके लाग, मानव अधिकारके लाग काहे साहित्यिक आन्दोलन नैकैना ?

थारु साहित्यमे सबाल्टर्न पात्र बहुट बटैं, मने ओइने विद्रोही हुइ सेकट नैहुइँट् । जबकि यथार्थ का हो कलेसे माओवादीके १० वर्षे युद्धमे हताहत हुइल सबसे ढेर थारु समुदायके रहिंट ।

थारु साहित्यके स्रोत नेपाल किल हो । छिमेकी मुलुक भारतमे लाखौँके संख्यामे थारु बसोबास रलेसे फेन वहाँ थारुभाषा नैबोल्ठैं । सबसे घन बस्ती रहल भारतके पश्चिम चम्पारनके थारु भोजपुरी भाषा बोल्ठैं । कामके सिलसिलामे टमान देशमे बसोबास करुइया थारु वहाँसे गजल, मुक्तक लगायत साहित्य सिर्जना करटि बटैं ।

अनलाइनमे थारु साहित्यिक, समाचार, कथा, कविता कम ठाउँ पैले बा । थारु साहित्य फेन आब डिजिटल दुनियाँमे आघे बर्हटि गैल बा ।

थारु साहित्यके सिर्जनामे सामूहिक प्रयासके अभाव बा । २०७३ बैशाख ३ ओ ४ गते दाङमे थारु थारु साहित्यिक मेला हुइलहस राष्ट्रिय स्तरके थारु साहित्यिक कार्यक्रम नियमित हुयल नैहो । राजधानीमे २०६९ माघसे नियमित थारु साहित्य केन्द्रित कार्यक्रम हुयलेसे फेन गुणस्तरीय काम हुइल नैहो । राष्ट्रिय रूपमे थारु साहित्यकार लोगनके जमघट नैहोके, साहित्यमे लागल ओइनहे प्रोत्साहन नैहोके यी आघे जाइ नैसेकठो । मने, थारु साहित्यमे निराशाके बड्रि भर ढिरेसे फटुटि गैल बा, विविध विधामे इन्द्रधनुषी सप्तरंग स्थान बनाइ भिरल बा । थारुनके चाहना साहित्यमे मुखरित हुइ लागल बा । देश संघीयतामे गैल ओरसे थारु साहित्यके विकास, विस्तारमे अभिन कुछ हुइ सेकी । विद्यालय तहमे मातृभाषामे पठनपाठनके अभियानहे आघे लैजाइ सेक्लेसे थारु लगायत अन्य भाषाके फेन विकास हुइसेकी ।
कृष्णराज सर्वहारी

थारु साहित्यके डगर

कृष्णराज सर्वहारी

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