मै फेन कुछ कैके डेखैम

बुनु चौधरी थारु
१३ आश्विन २०७८, बुधबार
मै फेन कुछ कैके डेखैम

कविता


यी समाज कहठ
ओइनके पविारमे
छाई छाई किल बटिन
के पल्हिन बुह्राइलमे ?
के आगी डिहीन मुलेपर ?
वंश कसिक चल्हिन ?
हेलहाके पात्र बन्ठाँ ऊ डाई बाबा
छाईक जात डोसर घर जैना जात कटि
छाईन् समाज परिवर्तनके
हिस्सा बने नै सेक्ठाँ
अस्टे अस्टे बात समाज काटठ्
मने छाईन् फेन कुछ कैके डेखैठाँ
उदाहरण टमानीक् बा
अपन समुदाय के हक हितके लग
लरना शान्ता र्चौधरीहे हेरी
जे कमलरीसे सभासद बन्ली
नारी शिक्षामे जोड डेना मलालाहे हेरी,
बेचल चेलीबेटीन्के उत्थानमे लग्ना सुनिता दनुवारहे हेरी,
सगरमाथामे चौह्रके शान बढैना पासाङ ल्हामुहे हेरी,
संपांग मनैन्हे चुनौती डेटी
साहित्यमे समर्पित झमक कुमारीहे हेरी,
छाईन् फे कुछ करे सेक्ठाँ
छावा बराबर काम करे सेक्ठाँ
मै एक छाई
समाज मे
मै फेन क्छ कैके डेखैम ।

बुनु चौधरी थारु
लमही न. पा. –७ द्यौखर

       
मै फेन कुछ कैके डेखैम

बुनु चौधरी थारु

लमही न. पा. -७ द्यौखर

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