मोटरि पुगल विदेश

संगम चौधरी
८ कार्तिक २०७८, सोमबार
मोटरि पुगल विदेश

छोट–छोट रहलमे हमार आजि, बुडि, नानि कना करिंट । डगरे–डगरे नाखेल्हो रे लर्को बाजि मोट्रिमे बहानके लैजिठैं । हम्रे मोट्रि वालन डेखिटे डराके भागि । उ कैसिन मोटरि वाला रहिंट कना आप पटा चलटा । ओइने टे हमार थारुनके गर गहना खोज्टि नेगैं । हमार आजि बुडि नानि ओइने चट्टुरमे गन्जाहा रहिट कि का पुरान गरगहना का काम लागि, बैँस ओरागिल के घालि कैके सब बेंचडर्लै । अपन जवानिक चिन्हा फेन बांकि नैढर्के बेंचडर्लै । अपन भौंका सुन कराके,अपन घेंचा बुंच कराके, ना रहगैलिन घेंचम सुत्या ना रहगैलिन नाकेम नथिया । ना रहगैलिन हड्यार, लाल, काइल गुरिया ना रहगैलिन हाँठक बाला, ना घेचम गुरिया ना हांठेम चुरिया । ना कानेम झिलमिल्या ना नाकेम नथिया ना अंगरिम पैसक मुनरि ना गोरम पैंचुरि । जोन पुरखनके पहिचान रहिन सब उहे मोटरि वाला लैगिलै । हमार आजि,बुडि,नानिनके पहिचान मोटरि वालन लैगिलै  । सब बेंचडर्लै थारुके सिंगार । काहाँ गैलिन हामर पुरखनके सोल्हा सिँगार । हेरागैल चांडिक सुरगुल्लि लागल पैंसक माला, हेरागैल घेचाक सुत्या माला, हेरागैल कानक  झिलमिल्या, टरकि,हेरागैल सोनक फोंफि नथिया । हेरागैल कारा बाला । हेरागैल पैंसक मुन्डरि, पैंचुरी,घुन्ना । हेरागैल सब ओकर सहेर नै भेलो नैकरके ।आप उहे किम्टि होगैल बा । अपन पहिचान किने नै सेक्ना होगैल बा । आज उहे आजि बुडि नानिनके सिखा नतिन्यन करे भिरल बटैं । मने जम्माके नाहि अभिन अनारि बटै । पहिरनमे नाच÷कोर, गिट÷बांसमे अनारि बटैं  । पहिरन घालके किल नै ओकर इज्जट फेन करे पर्ना जरुरि बटिन । आजकालिक नतिन्यनहे । लहङ्गा चोलिया फरिया उरैटि छोक्रा झुम्रा नाच ओर भिरे पर्ना जरुरि बटिन आजकालिक नतिन्यनहे । जोन हमार आजि बुडि नानिनके पहिचान हो । नटिन्यनहे थारु भेस,भासा,नाच÷कोर,गिट÷बांस संगारके ढार्ना जारुरि बटिन । आजि बुडिनके भौंकि भौंकाक गर गहना खोज्ना जरुरत  बटिन । टब जाके बचाइ सेकब अपन पुरखनके पहिचान । जय थारु गिट संगिट ।

संगम चौधरी

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