उज्रल गाउँमे कुण्डा

संगम चौधरी
१४ कार्तिक २०७८, आईतवार
उज्रल गाउँमे कुण्डा

बहुट बरष पहिले माहाकालि लडिया सोनक लाउ निकारके लैगिल ठाउँ । लडिया ठाउँ छोरके पच्छिउ लागल पाछे उ ठाउँ भयानक जलजला बनेपुगल । ढिरे ढिरे उ जलजला हे सेवार घाँस ओ ढडढि छोपलेहल । जोन जलजला मानैनके लाग बरे खट्ररनाक नैरहे कना नैहो कि जाट्टिक डर लग्टिक ठाँउ बनेपुगल । जहाँ बरे बरे ठुल अज्गर साँप, खेचुहि, मच्छिसे लेके बरे बिसहा साँपनके डेरा रहे । ओकरे पाँजर बरे गझिन बनुवा । उ बनुवम हाँठिसे लेके बाघनके ठेगान नैरहे । जोन बनुवा सुख्ला फाँटा आरक्षसे जुरल बा ।

बाट हो कन्चनपुर जिल्ला बेलौरि नगर पालिका वाडा न०९ मे रहल कुण्डा गाउँक । जौन ठाउँ तिनचो राना जाटिनके बस्टि उजर गैलक हो । बहुट बरष पहिले उ जलजलाके किनारमे लवलपुर कना छोटमोट बस्टि रहे । हाल अब्ब उ गाउँ नैहो । कारन उ ठाउँमे भयानक दानब रहे । जब जब राना जाटिनके बस्टि सुरु होए उ दानब बहुट जहनके ज्यान लेहेलागे ओ जलजलामे मनै सम्याइ लग्लक ओरसे उ गाउँ उजरजाए । अस्टके उहे ठाउँम तिनचो राना समुदाय गाउँ बैठाइ खोज्लैं मनै मने सेक्लै । पाछे २०२७ सालओर फेनसे लावा बस्टि सुरु हुइल जोन बस्टिके नाउँ कुण्डा गाउँ परेगैल । कारि कुण्डासे परिचिट कुण्डा गाउँके जल्मौटि लहुरान घर, घोरसुवान घर, फुरस्या भर्रान घर, ओ लोहरान घरसे सुरु हुइल हो । अभिन फेन कारि कुण्डा रहस्यमय बा । बहुट बरष पहिले कारि कुण्डम डिउँटक ठान रहे । कारि कुण्डा राना भासक शब्ड हो । थारु भासाम (करिया कुंरहा) हुइट । पहिले राना समुडाइके ढारल नाउँ अभिन फेन कारि कुण्डा के नाउँसे चिनजाइठ । कारि कुण्डक भारि सत रहिस ओ अभिन फेन बटिस । कारि कुण्डा जत्रा भारि बाहार अइलेसे फेन उ कुण्डा कबु ढिङ्गुल नैहोए । उ समयमे कुंरहक गहिराइ पत्ता लगाइकलाग एक गढक लाडके सुटफेन नैपुग्लक जनैठैं । कारि कुण्डक डिउँटा मनैनके पिर मार्का बुझ्ना करे । भोजेम डुल्हा डुल्हिक पहिरनसे लेके रिझैना खैना सक्कु मेरिक भारिे छोट भाँरा डेना करे । अस्टके कुट्ना पिस्ना हुइलेसे उहे कुण्डक ढिक्वम ढारैलेसे कुट पिसके ढारडेहे कैके पुरखा लोक बटैठैं । उहाँ जैनासे पहिले एकठो  आँरा ओ ल्वाङ चर्हाके जाइपरिन । ढिरे ढिरे उ कारि कुण्डा दिउँतक चर्चा जहोंर टहोंर फैलगैल । ढेरजाने भोजाहा सामान चहलेसे उहैसे नन्ना करिंठ । बटैठै. एक्ठो मनैया भाँरा मजासे नैढोके ढारडेहल टबसे उ दिउँता सबकुछ डेना छोरडेहल । पाछे उहे कुण्डक ढिकुवम मनै डुंगे लग्लै टबेसे उ कुण्डा ढिरे–ढिरे भंठे लागल । कुन्डा गाउँक बिच्चेम एकठो घंघरिया टलुवा बा । इ घंघरिया शब्द फेन राना भासासे आइल हो । बटैठैं पहिले राना बस्टि रहलमे एकठो राना महिला उ टलुवामे लुग्रा ढुइ ओ लाहाइ गैलमे उहे टलुवम सम्यागैल । टबे से घंघरिया टल्वा नाउँ से चिन्हे लग्लैं । लवलपुर गाउँ उजर पाछे लावा गाउँ पाँच–छे ठो पाहारिे घर परिवारसे सुरु हुइटि थारुनके घर थप्टि गैल । अस्टके कुण्डा गाउँ भारि होगैल । गाउँमे भारि भारि थारुनके घर बने लागल । कोइ दाङसे अइलै टे कोइ कहुँसे । थारुनके बस्टि बैठल टे थारुनके नाचेले गाउँ मन्के लागिन । गाउँमे एकता हुइलक मारे गाउँक बिकास फेन हुइटि गैल । भारि–भारि गुरुवन फेन गाउँमे आगैलैं । गाउँ बल्गर हुइलक कारण । पहिलक गाउँहे उजार करुइया राक्षस फेन हार खागैल । अस्टके गाउँक मनै कारि कुण्डाक डिउँताहें गाउँक एक कोनुवामे ठान डेके पुजे लग्लैं । गाउँक बिस्वास बटिन कारि कुण्डक डिउँटा गोरु बछरुनके ओ गाउँक सेवा कर्ले बा । गाउँसे उत्तर बनुवम छ–सात सौ मिटर भित्तर रहल कारि कुण्डाके मर्मत जारि करले बटै गाँउक समाज ।

कुण्डा गाउँक जलम छे घरसे हुइलिस कलेसे आब्बा  एकसय असि घर होसेकल बा । थारुनके घर परिवारसे भरल कुण्डा गाउँमे हाल अब्बा पहिलक पुरान मनै एक्क डुठो किल बचल बटैं । जे कुण्डक इटिहास बताइ सेकठ । गाउँक गुरुवा डेबढिया । पुरखा दान बाहादुर दंगौरा ।उहे दान बाहादुर बुडुसे घण्टो सम बाट करट घचिम बुडु बरे दुखके बाट कलैं । कुण्डा गाउँ पहिलक जसिन नै रहगिल । एकता नैरलक कारण घर परिवारके फुट हुइटि जाइटा । घरक समस्यासे युवा विदेशओर लग्टी बटैं । सबके अपन अपन समस्या बटिन टे गाउँक समस्या के हेरि । गाउँमे राजनिति डल ढेर होगिलैं । ओकर कारन गाउँक एकतामे असर परटिबा । पहिले गाउँक भलमन्सासे सजाज चलटेहे । भोजकाज, तर टिह्वार नाचकोरसे गाउँ जिउगर रहे । मने आप जस्टक गाँउक पुरखा ओताइटै ओस्टक गाउँ फेन अढमरहा रुखुवा हस होगैलबा । बुडु दान बाहादुर से बरे लम्मा बाटचिट हुइना करम मे अन्टमे कलै । हेरो बुडु अब्बक लर्कन हमार पुरखनके पहिचान ओर ध्यान नैहुइन । ना कोइ मागर गाइठ ना सजना ढमार जानठ । ना पहिलक जसिन नाचे जान्ठैं । ढिरे ढिरे हमार थारुनके गिटबाँस भासा पहिरन हेरैटि जाइटा । बहुट जहन कनु मोर ठन रहल गिटबाँस लिखो रे । ज्ञानगुनके बाट सिखो रे । नैटे पाछे पस्टैबो ।

गाउँ घरडुवार खेटुवा जगैना गिटबाँस ओ नाचकोर हो पुरखा लोग कहिंट नाहि कि जात्तिक बाट हो । पहिले धान काटके सेक्ले से औलि उटारिठ ओ खेटवमसे नचटि घर पुगिंठ । लावा घर जगाइक लाग नाच करिठ । गाउँ जगाइक लाग महिनौ सम सखिया नाच करिठ । टर टिह्वारमे नाचिंट । गाउँ मन्डरक टारसे मन्के । उलर उलर मडरिया मन्डरा बोजाँइठ । नचुनियन घुमघुमके लहङ्गा उराँइठ । मने आप कहाँ गैल गाउँ ठरकैना मन्डरा । झाल मजिरा । कहाँ गैल लहङ्गा फरिया । कहाँ गैल गाउँक नाच । कहाँ गैले मडरिया, नचुनिया । कहाँ गैले गुरुवा बैडवा । सब सुन–सान ।

हो अब्बेक पुस्टा हम्रे अपन पहिचानहे बचाइ पर्नाबा कना नाहि कि जात्तिके चुटटिक पस्ना घुटठि पुगाके । ठेहुनि गारके भिरेपर्ना बा । जाटटिक बाट हो हमार पुरखा ओरैटि जाइटै । उहे संग ओइन ठन रहल हमार असलि पहिचान बिल्लैटि जाइटा । आज हम्रे अपन थारुनके असलि पहिचान बचाइ नै सेकबटे अइना डिन पस्टाइ परि नाहि कि जरुर बहुट पस्टाइ परि । काहे कि हमार ठन थारुनके असलि पहिचान नै रहजाइ । ओराइल ।

संगम चौधरी

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संगम चौधरी

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