गोचाली

सुदिन चौधरी
१७ बैशाख २०८०, आईतवार
गोचाली

कविता

गोचाली

टोहाँर जरम पैलक् फें पचास बरस पुगल
टोहाँर मैगर इतिहास पहे्रबेर
दाङ्ग्के गरुवा म जरम पैलो
गझिन बनवाँ के फँटुवाम
दाङ्ग् लडियक् रटुइयाम
अन्ढार कोन्टिम
थारु कमैयाके झोपरिम
डँरिया भात संग
आमिल लर्चक कपुवा खैटी
सुखाइल झाझ्या खैटी
बस्या मार पिटि
कबु घाेंघिसंग छबुवा जाँर पिटि
कबु भुख्ल कबु पियासल
बहरलो पहोरलो ।
गोचाली
टुँ मुक्ति बनक जरमलो
टँु स्वतन्त्रता बनक जरमलो
टुँ संघर्ष बनक जरमलो
टँु स्वणिर्म युग बनक जरमलो
टुहाँर हत्या करक लाग
पन्चायति व्यबस्था पाछ लागल रह
टुहाँर हाँठम जन्जिर बान्ढक लाग
सामान्ती सत्ता खोजटी रह
टुहाँर ग्वारम नेल भिराइक लाग
लुहाकिक सिक्री भागलरह
टुहाँर बोल्ना मुउ सियक लाग
सुजाहा सुत्री जुटाइल रह
टभु फें
टुहाँर रक्षा के लाग
टुहाँर सुसार कर्टी कर्टी
मुक्ति स्वतन्त्रता व न्याय के बात
बटोइटी बटोइटी
कभु निमुना मेर क
जुग जुग बँच्टी
बिदाबारी लेल यी धरती से
सगुन लाल, मङ्गल, जोख्खन,
भिम, रुपलाल, बेद प्रकाश आदि
गोचाली
टँु सामाजिक सास्कृतिक रुपान्तरण के समबाहक हुइटो
टँु कमैया कमलहरी हुकन मुक्त कर्ना अगुवा हुइटो
टँु राजनैतिक आर्थिक म चेत जगैना गुरु हुइटो
टुँ रुढिबाद विरुद्ध मुक्का पट्कना योद्धा हुइटो
टँु प्रगतिशिल साहित्य सस्कृतिके निरन्तर यात्री हुइटो
टँु अन्याय अत्याचार विरुद्ध बोल्ना आवाज हुइटो
टँु पछ्गुरल समाजह मुक्तिक डगर डेखैना बरघर हुइटो
गोचाली
अपरधी प्राकृती बिपद, सुन्सान बस्ती
कोभिद १९ नोभेल कोरोना भाइरस
सपना के भव्य समारोह, रजत जयन्ती
भताभुङ्ग हुइल
कयौ गित गजल कविता कथा
डायरिके पाना म बन्दी बनगिल
सयौ साहित्यकार हुक्र कोन्टिम बन्दी बनगिलैं
एक सुनौलो अवसर छुटल
टुहाँर गुनगान गैना मच्छ छुटल ।
गोचाली
थारु भाषा साहित्य के निरन्तर अगुवाइ करहो
प्रगतिशिल साहित्य सस्कृतिके निरन्तर अगुवाइ करहो
जुगजुगसम आपन डगर नाछोरहो
शुभकामना शुभकामना ।

सुदिन चौधरी
बेलभार बर्दिया

गोचाली

सुदिन चौधरी

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