गजल

अंकर ‘अन्जान सहयात्री

वर्षौ से सुटल समाज, उठैना बा डाई

१ कार्तिक २०७८, सोमबार
कालु राम चौधरी

अपन अस्तित्व ओ पहिचान बचाइ

२० आश्विन २०७८, बुधबार
दिपक चौधरी ‘असीम’

अपन बोली भाषा पहिचान बचैना बा

१५ आश्विन २०७८, शुक्रबार
संगम कुस्मी

जा होए रकतके लडिया बहैम समाजके लाग

१५ आश्विन २०७८, शुक्रबार
सत्यनारायण दहित

टोहाँर लग

१४ आश्विन २०७८, बिहीबार
दिलिप टेंर्रा

का खैना हो

१२ आश्विन २०७८, मंगलवार
ठाकुर अकेला

छाइके जनम

११ आश्विन २०७८, सोमबार
संगम कुस्मी

सबके घर हहरैटि फोंहैटि अइहो अँट्वारी टुँ

२७ भाद्र २०७८, आईतवार
तिलक डंगौरा

हर दिन हर एक लावा समस्यासे जुझटुँ मै

२० भाद्र २०७८, आईतवार
संगम कुस्मी

एकजुट हुइ पर्ना बा कुछ कर्ना बा पहिचानके लग

७ भाद्र २०७८, सोमबार