मुक्तक

अंकर अन्जान सहयात्री

छप्रमफें पहिचान बिल्गाइठ

१८ पुष २०७९, सोमबार
हिराकुमारी चौधरी

चार मुक्तक

१२ आश्विन २०७८, मंगलवार
कलापती चौधरी

यी बन्द आँखी भर सपना सजाइटुँ

२० भाद्र २०७८, आईतवार
शुशील चौधरी

जिन्गी जियक् लाग काम करेक् परल

१३ श्रावण २०७८, बुधबार
अंकर अन्जान सहयात्री

कोइ आके बडल डेहठैं जिन्गी

७ श्रावण २०७८, बिहीबार
सुशील दहित

इ भुमि इ माटी बचाइक लाग तयार हुइ

७ श्रावण २०७८, बिहीबार
अर्जुन चौधरी

अपन देश ठाउँके लाग कुछ कर्ना बा यहाँ

२२ असार २०७८, मंगलवार
रामचरण चौधरी ‘अजरइल’

कुछ लिखुँ कैह्के कलम उठैठुँ कलम रूक जाइठ्

१५ असार २०७८, मंगलवार
सन्जीप चौधरी

नयाँ बिचारहे काम डेउ

८ असार २०७८, मंगलवार