यी बन्द आँखी भर सपना सजाइटुँ

कलापती चौधरी
२० भाद्र २०७८, आईतवार
यी बन्द आँखी भर सपना सजाइटुँ

मुक्तक

यी बन्द आँखी भर सपना सजाइटुँ ।
बेदना मन भिट्टर आँखीमसे बहाइटुँ ।
खै किहि सुनाउँ खाली मनके डरड यहाँ,
विकल्प ओहे बा मुस्कुराके पिरा भगाइटुँ ।

कलापती चौधरी
कृष्णपुर २ डेखटभुली कंचनपुर

यी बन्द आँखी भर सपना सजाइटुँ

कलापती चौधरी

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