हाँस्यव्यंग्य विधामे थारु

लक्की चौधरी
६ आश्विन २०७८, बुधबार
हाँस्यव्यंग्य विधामे थारु

हाँस्यव्यंग्य विधामे थारु
समाजके गतिशीलता ओ व्यक्तिके गतिविधिसंगे हाँस्यव्यंग्य विधा सिर्जना हुइल माने सेकगैल बा । मनैनके स्वभावके औरे पक्ष फेन रठिन्् । समाजमे या खुशी ओ मनोरञ्जन किल नैहो । दुःख बा, वेदना बा । तनाव ओ गरिबी बा । बेरोजगारी, जातीय विदेशसे टमान विकृति ओ विसंगति विद्यमान बा । ओहेबेलामे मनै राहतके सास लेना चहठैं । तनाव ओ पीडाहे कम कर्र्ना उपायके खोजीमे लग्ठैं । टमान चुनौति बीच मुटु उप्पर पठ्रा ढारके हँस्ठैं । हँस्ना ओ हँसैना करेपर्ना बा । ओहे विधा जो ‘हाँस्यव्यंग्य’ हो । यीे विढाहे अब्बे नेपाली संस्कृतिके रुप लेसेकल बा । समाज, देश ओ गाउँ टनाव ओ विसंगतिमे आहाल हुइल बेला जनभावना बुझ्ना एकठो थर्मोमिटरके काम कर्र्ना विधा हो, ‘हाँस्यव्यगं्य’ । मनैके दुःखमे साथ डेना अक्सिजनके काम यीे करठ् । व्यक्तिके टनाव एक घचिके लाग हुइलेसे फेन डुर कराइठ् । राहत हुइल महुशस कराइठ् । बुझुइयन यी विधाहे टमान कोणसे बुझ्ठैं । तथापि अशिष्ट, असभ्य, अश्लील, अभद्र गालीगलौज कर्र्ना विधा जो हो, हाँस्यव्यंग्य । यी टे शिष्ट, सभ्य, शालीन ओ भद्र आलोचना कर्र्ना विधा हो । एकर मक्सद् समाजहे सकारात्मक रुपान्तरण कर्ना हो । यीे व्यक्ति ओ समाजहे व्यंग्य कैके सुढर्ना डवाव डेठैं । यी वैचारिक स्वतन्त्रताके चेत बोकल बा । विकृति विसंगति विरुद्धके चेतना संकेत बरठ् । एक ओर सकारात्मक परिवर्तनके डवाव सिर्जना करठ्, औरे ओर मनैनहे हँसाइठ्, मनोरञ्जन प्रदान करठ् । टबमारे टे यी विधाके नाउँ ‘हाँस्यव्यंग्य’ हुइगैल हो ।

नाटक–कथामे हाँस्यव्यंग्य
थारु समाजमे विधागत रुपमे हाँस्यव्यंग्यके विकास अभिन नैहुइल हो । टबमारे ओकर चेत अवश्य बा । थारु पुर्खाहँुक्रे अपन समयमे मनोरन्जनके लाग टमान नाटक लिखिंट । ओकर मञ्चन करिंट । नाटक मार्फत् समाजके कुरीति ओ कुप्रथाप्रति कडा व्यंग्य करठैं । शासक प्रशासक ओइनहे व्यंग्य करठैं । ठिक्के ओहे शैलीके नाटक मञ्चन अब्बे नैहुइलेसे फेन परिवर्तित अवस्थाके नाटक मञ्चन नैहुइल हो । समाजमे काल फेन विकृति विसङ्गति, अन्धविश्वास रहे । आझ फेन बा । काल्हके नाटक समाजप्रति लाज रहे । सामाजिक कुसंस्कार प्रति लाज रहे । समाजके मजा पक्षके प्रचार कर्ना ओर केन्द्रित हुइठ् । टबमारे आझ समय बडलल् बा । अब्बे नाटकमे सामाजिक, सांस्कृतिक संगेसंगे राजनीतिक विषय ढेर जोरके आइठ्् । समाज रुपान्तरणके लाग शैक्षिक विषय फेन नाटकमे जोरके आइल बा । यीे एक ओहर चेतनाके सन्देश प्रवाह कर्र्ना काम करल बा, औरे ओरे मनोरञ्जन फेन प्रदान करल बा ।

थारु ओइने मन्चन कर्र्ना नाटकमे ‘जोकर’ पात्र अनिवार्य बा । जिहिनहे थारुमे ‘सोंगिया’ कठैं । ओहे पात्र मार्फत मनोरन्जन ओ ‘व्यंग्य करल’ सन्देश डेना प्रयास कैगिल बा । नाटकके कथाहे एक मेरके सन्देश डेना हुइल बा । ओकर अलावा नाटकके कथावस्तुहे चटकार बनैना ओ दर्शकके ध्यान अपन ओर टन्ना काम जोकर (साेंगिया) करल बा । ‘जोकर’ हेरेबेर उटपट्यांग खालके रहठ् । ओकर लगाम अनौठो रठिस् । ओकर साजसज्जा ओ शैली औरे जहनसे फरक बा । नाटकमे मन्चन हुइना ओरे पात्रसे उ फरक डेखाइठ् । नाटकमे किल नैहो, थारुनके संस्कृतिजन्य नृत्य, नाचगानमे फेन जोकर पात्र सिर्जना कैल बा । ओहे जोकरहे दर्शकके ध्यान अपन ओर आकर्षित करठ् । ओ सोंगियाहे कौनो फेन नाटकमे ‘चट्नी’के काम कर्र्ठैं । भोजनसंगे जैसिक ‘चट्नी’ नैरहठ् टे फिक्कल लागठ् । चट्नी रलेसे भोजन मिठ बनठ् । ओस्टेके जो कौनो फेन लोककथा, नाटक ओ औरे प्रस्तुतीमे ‘साेंगिया’के भूमिका चट्नीके रुपमे बा ।

थारु हुर्डुगंवा नाच, झुम्रा, सखिया, मुगं्रहवा, झुम्रा, बर्कानाच होए कि बैठक्की या दिननचुवा, सक्कु नृत्यमे जोकर (साेिंगया) अनिवार्य बा । उ दर्शकहे अपन कला ओ प्रस्तुतीहे मनोरन्जन प्रदान करठ् । संगेसंगे कथावस्तुहे दिन खोजके व्यंग्यात्मक सन्देश डेटिरहठ् । टबमारे जोकरके भूमिका निर्वाह कर्र्ना पात्र हमार चेत हुइल, ‘समाज बुझल’ हुइपरठ् ।

साहित्य लेखनमे हाँस्यव्यंग्य
हाँस्यव्यंग्य विधाहे थारु समुदाय विधाके रुपमे विकास करटि रहल टे बा । फुटकर रुपमे साहित्यिक रचना प्रकाशित हुइल करलेसे फेन विधागत रुप यीे लेहेसेकल नैहो । मनैहे हँसैना ओ व्यंग्यसहित सन्देश प्रवाह कर्ना फरक विषय हो । हँसैना किल हाँस्यव्यंग्य नैहो । यी विधामे कौनो ना कौनो परिवर्तनके चेत मिलल् हुइपरठ् । पंक्तिकारहे थारु चुटकिलाके पुस्तक ‘हँसौनी’ (२०७२) प्रकाशित करल । थारु समुदायमे थारु भाषामे प्रकाशित हुइल पहिल चुटकिला संग्रह बनल । टब्बे ओमे विशुद्ध थारु जनजीवनके चुटकिला बा । थारु भाषामे चुटकिलाहे ‘हँसैना कठैं । टब्बे यीे शब्द ठोरचें थारुहे जानकारी बा । अधिकांश चुटकिला नैबुझ्ठैं् ।

ओस्टेके साहित्यकार कृष्णराज सर्वहारीहे ‘ढोंढोंपोंपों’ कृति प्रकाशित कैके उहिहे हाँस्यव्यंग्य कृति कैके नाउँ डेहल बा । टब्बे ओमे हाँस्य रस बा, व्यंग्य नैहो । हँस्ना फेन अश्लील ओ विकृत बा । टाकि हाँस्यव्यंग्य विधा समाजके विकृति ओ विसंगति हटैना वकालत करठंै । सकारात्मक परिवर्तनके बहस करठ् । एकर मटलब सर्वहारीके कृति ‘हाँस्यव्यंग्य कहे नैमिली’ थारु साहित्यकारके बुझाइ बा । आझ सर्वहारी टे चुटकिलाहे नेपाली साहित्यके ‘अंश’ समेत स्वीकार नैकरठै ं। थारु उखान (कहकुट), फोक्रीमे फेन हाँस्यव्यंग्य पइठैं ।

ओस्टेके साहित्यकार चित्रबहादुर चौधरी, सुशील चौधरी, छविलाल कोपिला, अशोक थारु, बमबहादुर थारु, गोपाल दहित, महेश चौधरी, पुल्कित चौधरी, बुद्धसेन चौधरी, सियाराम चौधरी, रमानन्द लेखी, रामलगन चौधरी, प्रकाशनाथ चौधरी, दिलबहादुर चौधरी, मनिराम थारु लगायत अपन फुटकर रचनामे व्यंग्यात्मक चेत ढारल डेखजाइठ् । टबमारे हाँस्यव्यंग्यहे विधाके रुपमे लिखल नैपाइल हो । अब्बे थारु साहित्यमे युवा साहित्यकारके भारीे जमाट बा । ओइनके कथा, कविता, गीत, गजल, मुक्तक, हाइकुमे व्यंग्यात्मक चेत डेखाइठ् । टबमारे विशुद्ध हाँस्यव्यंग्यके रुपमे लिखल रचना ठोरचें किल भेटाजाइठ् । ठिक्के कलेसे थारु साहित्यमे हाँस्यव्यंग्यहे अपन स्थान बनाइ नैसेकल हो । हाँस्यव्यंग्य नेपाली साहित्यके एकठो रुप बनल अब्बेके अवस्थामे थारु साहित्यमे यी विशिष्ट स्थान बनैना बाँकी बा ।

हाँस्यव्यंग्यमे राजनीतिक चेत
राजनीतिक विषयवस्तु समेटके लिख्ना लेखकहे हाँस्यव्यंग्य विधाहे जोर डेके छिटफुट लेख रचना लिखल पाजाइठ् । मेला, महोत्सवके स्टेजमे कर्र्ना प्रस्तुतीमे अब्बे हाँस्यव्यंग्य ठाउँ पासेकले बा । राजनीति कर्र्ना थारु अगुवाहुँक्रे राजनीतिमे व्यंग्यात्मक भाषन करल फेन डेखजाइठ् । टब्बेमारे ढेर कम मात्रामे । थारु लेखकमे पंक्तिकार अपनहे, सुुशील चौधरी, एकराज चौधरी, कृष्णराज सर्वहारी, छविलाल कोपिला, महेश चौधरी, महेश्वरप्रसाद चौधरी, फनिश्याम थारु, निरा भगत, गोपाल दहित, राजकुमार लेखी, चन्द्रनारायण चौधरी, शैलेन्द्र चौधरी, लक्षण थारु, रेशम चौधरी, सीताराम थारु लगायत कलम चलाइल डेखजाइठ् । यी लेखकके रचनामे, सिर्जना राजनीतिक हाँस्यव्यंग्य चेत स्पष्ट रुपमे आइल पाजाइठ् । टबेमारे यिहिहे पर्याप्त माने सेक्ना आधार नैहो । ओस्टे फेन नेपाली राजनीतिमे थारुके ठाउँ उच्च नैहो । पञ्चायतकालसे राजनीतिमे छिटफुट थारुके संलग्नता भेटाइलमे फेन मूलधारके राजनीतिमे ओइने स्थापित हुइ नैसेकले हुइँट् । ‘मन्त्री’ पदसमके जिम्मेवारीमे ढेर थारु पुग्लैं । टबमारे राजनीतिमे टिके नैसेकलैं । मन्त्री हुइल थारु अब्बे गुमनाम बटैं । राजनीतिमे सक्रिय नैहुइटैं । ना टे ओइने लेखन सिर्जनामे फेन सक्रिय नैडेखलंै । टबमारे हाँस्यव्यंग्यमे राजनीतिक सन्देश प्रवाह कर्र्ना रचना ओट्रा कर्रा प्रस्फुटन हुइ नैसेकल सत्य हो ।

सञ्चार माध्यममे हाँस्यव्यंग्य
थारु समुदायहे अपन मातृभाषामे सञ्चालन करल सञ्चार माध्यम ओ नेपाली भाषामे सञ्चालित थारुके सञ्चार माध्यममे फेन कौनो रुपमे हाँस्यव्यंग्य रचनाहे ठाउँ पइटि आइल बा । ओस्टके, थारु भाषाके चलचित्रमे समेत हाँस्यव्यंग्यके ठाउँ डेख्गैल बा । पंक्तिकार अपनहे अपन प्रकाशन ओ सम्पादनमे प्रकाशित करल ‘पहुरा’ साप्ताहिक, ‘हमार पहुरा’ अर्धसाप्ताहिक, ‘हमार पहुरा’ दैनिक पत्रिकाके ओ अब्बे ‘हमार पहुरा डट कम’ न्यूज पोर्टलमे समेत हाँस्यव्यंग्यसे भरल कौनो रचना प्रकाशित ओ सम्प्रेषित बटैं । साहित्यिक फुटकर रचनाहे समेत ठाउँ डेहल बा । टबसे अब्बे पहुरा दैनिक सहित थारु भाषाके औरे अनलाइन न्यूज पोर्टलमे फेन कौनो रचना हाँस्यव्यंग्य सन्देश बोकल भेटागैल बा । एकर आघे थारु कल्याणकारिणी सभाहे प्रकाशन करल ‘संस्कृति’ नाउँक् पत्रिकामे फेन हाँस्यव्यंग्यके फुटकर रचना प्रकाशित हुइल ।

निष्कर्ष
हाँस्यव्यंग्य अब्बे साहित्यिक विधाके रुप लेहल बा । राष्ट्रिय ओ अन्तर्राष्ट्रिय स्तरमे फेन यीे विधाके ठाउँ उच्च बा । नेपाली समाजमे विद्यमान विकृति, विसंगति, भेदभाव, अराजकताके ओरैना हेतुहे टमान कलाकार अपन कला मार्फत् प्रस्तुति डेहल हम्रे डेखटि । अब्बे राजनीतिक घटनाक्रम आझ ढेर हाँस्यव्यंग्यके खुराक बनल हम्रे पाइटि । कारण राजनीति जो असिन माध्यम हो, जेकर पहलमे सक्कु ऐन कानुन, नीति नियम निर्माण हुइठ । मूल नीति जो गलत डगरमे समाहित हुइल कलेसे देशके शासन प्रशासन जो गलत दिशामे जाइठ् कलेसे कलाकार, लेखक ओ साहित्यकार निरन्तर हाँस्यव्यंग्य मार्फत् खवरडारी करल हम्रे पाइटि । एकर मटलब, यीे विधा समाज रुपान्तरणके लाग हो । सही, सभ्य ओ भद्र समाज निर्माणके लाग हो । थारु समुदायमे विद्यमान रहल गुरुवाके तन्त्रमन्त्र हुइस् कि जाँर डारु बनैना, पिना ओ पिओइना परम्परा हुइन् । ओकर ढेर प्रयोग करलेसे समाज जो समस्यामे परके व्यंग्य चेत थारु लेखक ओ स्रष्टाके रचनामे भेटाजाइठ । अशिक्षित समाजके कारण कमैयाँ, कमलरी रुपी डासडासी जीवन जियल शिक्षामुलक सन्देश फेन हाँस्यव्यंग्य सिर्जनामे पाजाइठ् । थारु समुदायहे जागरुक बनाइ, गलत कामके खवरडारी करे ओ सकारात्मक पक्षके प्रचारके लाग फेन कौनो थारु लेखक ओइने हाँस्यव्यंग्य विधाहे रोजल पाजाइठ् । जोन सकारात्मक पक्ष हो । यद्यपि यी विधाके श्रीबृद्धिमे अभिन थारु लेखक, कलाकार, स्रष्टा ओ बुद्धिजिवीहे ध्यान डेहे पर्ना डेखाइठ् ।

लक्की चौधरी

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लक्की चौधरी

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