डेहरी थारु जातिनके सम्पतिके रुपमे

रेनुका चौधरी
१८ आश्विन २०७८, सोमबार
डेहरी  थारु जातिनके सम्पतिके रुपमे


थारु समुदायमे धान, गोहँु, मसरी, चउरहे व्यवस्थित तरिकासे ढरेक लाग अपनिहि सोचके माटिसे बनाइल चिजहे डेहरी कठैं । डेहरी कलेक धानपिसान लम्मा समयसम बरिया रहे कहिके घुनसुन, किराकटी ना लागे कहिके बनैले रठैं । एकर लम्बाइ मनैनसे लम्मा रठिस् । डेहरी धानपिसान ढारेक लाग एकडम उपयोगी रहठ् । डेहरी अपनअपन जातजातिनमे अपनअपन तरिकासे बनैले रठैं । डेहरीमे धानहे कइयो बरस ढरे सेक्जाइठ । हमार साल भरके खर्च मजासे सुरक्षित रहठ् । साल भरीक् खर्च ढारल धानमे मुस, किरा, घुन, नैलागे कहिके माटिक डेहरी बनाके ढर्ना चलन बा ।

डेहरी बनैना तरिका
सुरुमे डेहरी बनैक लाग चिक्टार माटि चहाठ् । कौनो मनै टलुवामसे काच्चे माटि नान्के बनैठैं । टे कौनौ मनै सुखाइल माटि भिजाके बनैठैं । सुरुमे माटिहे मजासे पानी डारके साने परठ् । टब जाके माटिमे बुसा डारके मजासे मिला मिलाके साने परठ् । माटिहे मजासे सान्के सेकके सुरुमे डेहरीके पेन्डी बनाइ परठ् । ओरि टारे बेर समठुर बराबर ठाउँमे पन्ेडीहे बनाइ परठ् । समठुर बराबर ठाउँमे चार कोनुवा रहल आकारमे पइरा बिछाके पैरक उप्पर माटिसे चउकुठ आकारके पेन्डीमे मुठा लगैना । घाम हेरके दिनमे एकचो मुठा लगैटी जैना । जस्टके मुठा लगैटी जैबो ओस्टके डेहरी भारी हुइटी जाइठ् । लगभग मनैनके बराबर ढेगं हूइ टब कोमक्याइना सुरु करबो दिनमे एकचो मुठा लगैबो कोमक्याइ दूई तिन दिनमे निपत जाइठ् । दुई तिन मुठा कोहमक्याइनाके संगे लास्टमे डेहरीके घेचा बनैबो घेचा बनाके अन्तिममे डेहरी भरकन बनैबो घेचाहे गोल आकारमेसे मिलैबो । टब लास्टमे भरकन बनाइक लाग डेहरीके पेन्डी बनाइ जस्टे बनाइबो सुरुमे पइरा बिछाके गोल आकार भरकन बनाइ जस्टे बनैबो सुरुमे पाइरा बिछाके पइराके उप्पर माटिसे डेहरीके मुके बराबर गोल आकारमे सुप्पा जस्टे बनाइबो चार पाँच दिनमे तयार होके सेकी एक हप्तासम घाममे मजासे सुखे डेह परठ् । मजासे सुखाइ टब डेहरीहे घरमे बैठैना काम कैजाइठ् । डेहरी अट्ना भरी रहठ् । अकेली मनाइ ढारे नैबनठ् । तिन, चार मनै मिल्के घरके भिट्टर लैजाइर्ठैं । दुइ दुइ जाने मिल्के आघे पाछे होके डेहरीके घरके भिट्टर लैजाके बैठैठ ।

हमार थारु समुदायमे डेहरीके महत्व बहुट ढेर बटिस् । हमार थारु समाजमे डेहरीहे सम्पतिके रुपमे मनना चलन बा । खास करके डेहरीके काम धानपिसान ढर्ना काम हो । जब हम्रे खेट्वामसे धानहे कटाइ डवाइ करके घरमे नन्ठि टब धान, गोहँुहे मजासे फटक फुटुकके डेहरीमे जकैठी । हमार थारु समुदाय कृषि पेसामे लागल समुदाय हो । हमार थारु समुदायमे कृषि पेसामे ढेउर लागल डेखजाइठ् । धान, गँहु, डेहरीमे ढरलेक कारण का हो टे रु काहे ढरठैं डेहरीमे धान रु कना प्रश्ना उठे सेक्ठ डेहरीके बारेमे नैजानल बुझल मनैनसे, डेहरीमे धान, गोहुँ नैघुनाए लम्मा समयसम सुरक्षित रहे । अभिन सम हमार जातमे माटिके डेहरीहे थारु जातिके सम्पतिके रुपमे मन्ना चलन बा । समय संगे अझकलके मनै परिर्वतन हुइल डेखजाइठ । अझकलके मनैनठे समय ढेर नैहुइलेक ओरसे डेहरी नैबनैना काम करठैं । एकडम कम मात्रमे बनैना करठैं । सहर बजार ओहर बहुट कम डेखा परठ् । यी समयमे सक्कु मनै सुविधायुक्त बन्ना खोज्ठैं । सुविधा खोजट खोजट अझकलके मनै अल्छी बनके बैठल बहुट डेखा परठैं । सुविधा ओ फेसलाटी जबनामे माटिसे बनाइल मन नैपराकेफें नैबनैठैं । टब्बे मारे थारु समुदायमे चलल् माटिके डेहरी लोप हुइना मुल समस्याके रुपमे डेखा परल बा ।
हमार थारु समुदायमे डेहरीके बहुट भारी भुमिका बटिस् । थारुजातमे खेतीपाती करके अपन परिवारके गुजारा चलैना अवस्था अभिनसम डेखा परठ् । सालभरके परिवारके खर्च कसिक पुगैना कहिके सोचके अवस्था डेखापरठ् । घर खर्च साल भरीक् धान ढरेक लाग बनाइल माटिक डेहरी बहुट उपयोगी बा । हमार समुदायमे प्रत्येक घर घरमे डेहरी डेखा परठ् । थारु जाटिनके सम्पति हो माटिक डेहरी ।

रेनुका चौधरी

कैलारी–७ रतनपुर

डेहरी  थारु जातिनके सम्पतिके रुपमे

रेनुका चौधरी

कैलारी–७ रतनपुर

0 Shares
Tweet
Share
Share
Pin