सुख दुःख के घरी

सेवा राम राना
४ कार्तिक २०७८, बिहीबार
सुख दुःख के घरी


खासकरके सक्कु आम मनैन्के मनमे एक बात सटाइठ्, कबु मजा काम नैबनल या काममे सफलता नैमिलट् टे भगवानहे डोष डेठी पर भगवान सक्कु जहन दुःख डेहठ् । दुःख अइनाफें मजा बात हो । भगवानहे दिलसे टनमनसे जा मांगो भगवान् इसारासे डेहठ्, भगवान डेर करठंै अन्धेर नै सक्कु सच्चा मन हुइपरठ् । जस्टे की एकठो छोटमोट लर्का घुमनेंग कर्ना सुरु करठैं उ समयमे लर्का खेलैना खेलैना सुरु करठैं ओ लर्का बहुट खुसी हुइठैं । पर अपसोचके बात रहे समयमे लर्काके डाइ खेलैना डेखाके लर्काहे बलैठैं, बच्चा गिरट उठट खेलैना ठिन पुग्ना कोशिस करठंै पर डाइ खेलैना फेन टान्लेठैं उ डेखके लर्काहे बहुट दुःख लग्ठिन टब उ लर्का मनमे सोचठ् कि टै मोर डाइ होके हो, कि कौनो डाइन असिक ठोरी ना दुःख डीइ । पर डाइके उद्देश्य कुछ अलग रठिन् । उ सम्झत मोर लर्का दुःख ओ सुखमे बराबर चले सेके, अपनेहे नेंगघुम करेसेके, अब्बे दुःख होके फेर पाछे सुख आइ । अस्टेके भगवानफें अपन भक्तन दुःख डेठैं । भगवान सोच्ठै की मनै जब हमेसा खुसी किल रहहि टो संसारके अनुभुति नैलेपैही टबमारे भगवान् सबके दुःख के घरी चालु करठ् । भगवान् हमन आघे बह्र्राइक लाग कुछ ना कुछ समस्या जरुर डेठैं । उ समस्यासे मुक्ति पाइक लाग हमेसा प्रथाना पुजापाठ करेपरठ् । भगवान प्रति सद्घा विश्वास हुइपरल, जिन्दगीमे सुख महसुश करेपरठ् चाहे जिन्दगीके सुख दुःख के घरी जौन सड्ड चलटी रहठ् ।

सेवा राम राना
पुनर्वास

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