बसियक शब्द सुनटी सोहावन 

विजय चौधरी
१० कार्तिक २०७८, बुधबार
बसियक शब्द सुनटी सोहावन 

 संगीत 

 

 

 पहिले पहिले हर गाँउक झराली कर्ढुनीम् बसिया झुरैले राखिंट् टब् कुलवक नाहाँपर बैठके मेरमेरके गीतके भाकामे बसिया बजाइ लागिंट् । अटियाँवन मेटावन,दुःख बिसरावन,सुनटी सुहावन लागे बसियक धुन । जब फगनहिया बहे लागे, टब बहुट डुर डुरसे बसियक बोल सुन जाए । भैंसरवन्, बर्डिवन, घंसकटवन्, किसनवन्,खेटवक मेर्वा पर पर डुम्ना पर पर बैठके अंटर अंटर बसिया बजाइट । सखिया नाच, झुमरा नाच, बसिया बिना अक्को चैनार नै लागे । लकिन अच्कल बसियक बोल ओनैना मौका नै मिलठ् । ढिरे ढिरे बसियक जबाना जबाना  थारुन्के गीतबाँसमे ओरैटी जाइटिस् कि का ? लागठ् कुछ बरस बाद छोट छोट लर्का बसिया कौन चिरैंयक नाउँ हो, बाब ? कैहके पुँछे ना लागिट । उहेसे बसियाहे चिन्हारु करैना ओ बजाइक सिखैना यी पक्तकारके खास अस्रा हुइस् । 

बसिया संसारभर पाजैना आपन रुप ओ आकार रहल फुंकके बजैना एक मेरके बाजा हो । बसिया सिर्जलक बारेम् कौनो प्रमाण्कि स्रोत नैमिल्लेसे फेन महाभारतके नायक कृष्ण भगवान सिपार ओ प्रमाणिक बसिया बजुइया हुँइट कलेसे गलत नैहुइ । कान्हा १६ सय गोपीनीन् बसिया बजाके मन मोहले रहिँट् । अष्टिम्की टिकजैना चित्रमे बसिया बजैटी रलक कान्हक् चित्र बनाके पुजा कैजाइठ । उहेसे बसियाहे पुख्र्यानी बाजा कहेसेक्जाइठ । थारु संस्कृतिमे फेन बसियक बरा भारी ठाँउ बटिस् । हर टरट्युहारके गानबजानमे राहरङ्गी करैना ओ सोहगाड बहैना काम करठ बसिया । 

बसियाहे बाँसुरी (टिरछेक् कैके बजैना) मुरली (ठार्ह कैके बजैना) बय, वेणु, बंशी, फ्लुट अस्टक ढेउर नाउँले चिन्हे सेक्जाइठ् । टिरछेक् कैके बजैना बसिया (बाँसुरी) बजैना ठनिक कर्रा हुइलक ओरसे ठार्ह कैके बजैना बसिया (मुरली) बजैना चलन ढेर बावइ । यकर एकठो कारण मुरली बजाइबेरसाँस फुंक्ना सहजिल रलक हो । लकिन जत्रा बाँसरीमे उटार चढाउ, कंपन गमक, खट्का, मुर्की, मोड जैसिन क्षङ्गारिक पक्ष बजाइ सेक्जाइठ ओत्रा मुरलीमे नैसेक्जाइठ, यद्यपी अंगरी लिलभिलवइना नियम एक्के हो । 

बसिया लगभग १२ ठनसे २४  इन्च सम लम्मा, १/२ इन्च समके गोलाई रहलक खोखरु बाँसक,पित्तरिक, लोहक या प्लाष्टिकके पाइपमे ६ ठनसे ८ ठो बिल्ला पारके बनाजाइठ् । फुंकुक्लग एकठो छुट्टे बिल्ला पारके पारजाइठ, जिहीहे बसियक मुंह कैहजाइठ् । बसियक मुहे सोझ फुकके टरेओर रहलक बिल्लापर अंगरी लिलभिलवाके बजाजाइठ । खास कैके बसिया टरका ढेबरेम् ढैके उपरक् ढेबर ओ सांसके सहारा लेके बजाजाइठ ।  आउर बाजा लेके बसियक स्वर महा मिठास ओ मुग्धकारी रहठ् । साइट उहेक मारे कृष्ण भगवानके बसियक धुन सुनके १६ गोपिनी, बनवक सारा जानवर, चिरैचुरुङ्गन मोहित हुइल राखिँट । लकिन आउर बाजक् नन्हे बसिया बजैना लिरौसी नै हो । यमहे सिपार हुइकलग ढेर धैर्य ओ साधनाके जरुरी बावै । 

यी लेख लिखुइया फेन ढेर बरसके त्याग ओ तपस्या कैके बसिया बजाइक सिख्लक हो । रातदिन बसिया संगे लेले रैह्जैना, सुटेबेर सिर्हन्नी ढैके सुत्ना, कहुँजाइबेर पैन्टक पछिल्का गोझुम ढैले रना,फुर्सट पैटीकिल पिलपिलवाइ लग्ना, करे यी जीउ । कैयो चो टे “ ढङ ना सहुर का बजैठे रे ? कनफोर मचैले ” कैह्के गरिवा फेन पैलस । लरफेट् लरफेट् कटार साँप निकरनाहस बजैठी  हो” कैह्के खिल्ली फेन उराइट सुनल । “फेन बजाई झे  भाइृ बरा बर्हिया धुन निकर्ली राम रे” कैह्के तारिफ फेन सुनल । मने ना सहुर पिलपिलवाइट्–पिलपिलवाइट् ठो ठोर ढङ लगाके बजाइसेक्ना हुगैल । अचकल यी जीउ फुर्सत मिलाके बसिया बनैना ओ बजैना डुनु काम करठ । 

का अपनी फेन बसिया बजाइक सिखल चहठी ? यदि चहठी कलेसे, आइ बसिया बजैना सहजिल नियम सिखी । सबसे पहिले बसिया हांठेमे ल ीओ मुँहक टरका ढेबरे पर ढारी । डुनु हाँठेक् बिच्का ३/३ ठो अंगरीले बसियक ६ ठो बिल्ला टुमी । आब ढिरेढिरे फुंकी सा स्वर आइ ।  आब बुझी सक्कु बिल्ला टुमके फुक्बो टे सा स्वर बजठ् । ओकर परसे टरक १ नं बिल्ला छोरके आउर सक्कु बिलला टुमके फुंकलेसे रे स्वर बजठ् । अस्टक १ ओ २ नं बिल्ला छोरके आउर सक्कु बिल्ला टुमके फुंकलेसे रे स्वर बजठ । अस्टक १ ओ ३ नं बिलला छोरके आउर सक्कु बिल्ला टुमके फुंकलेसे म स्वर बजठ । असटक १,२, ३ ओ ४ नं बिल्ला छोरके आउर सक्कु बिल्ला टुमके फंकलेसे प स्वार बजठ । अस्टक १,३, ४, ओ ५ नं. बिल्ला छोरके आउर सक्कु बिल्ला टुमके फुंकलेसे नि स्वर बजठ ।अ‍ैसिके बसियामे पहिला सप्टकके शुद्घ स्वर बजठ । इहे सुत्र लगाके ठनिक बल कैके फुंक्लेसे डुसरा सप्टकके शुद्घ स्वर बजठ । 

कोमल ओ तीब्र स्वर बजैना नियम भर ठोरचे फरक ओ कर्रा बा । १ नं.  बिल्ला आधा टुमके आउर सक्कु बिल्ला पुरा टुमके फुंकलेसे कोमल रे स्वर बजठ । अस्टक १ नं बिल्ला छोरके २ नं. बिल्ला आधा टुमके ३,४,५, ओ ६ नं बिल्ला पुरा टुमके फुंकलेसे कोमल ग स्वर बजठ । अस्टक १ ओ ३ नं. बिल्ला छोडके ४ नं.बिल्ला आधा टुमके २,५,ओ ६ नं. बिल्ला पुरा पुरा टुमके फुंकलेसे टीब्र म’ स्वर बजठ । अस्टक १,३ ओ ४ नं.बिल्ला छोरके ५ नंं. बिल्ला आधा टुमके २ ओ ६ नं. बिल्ला पुरा टुमके फुकंलेसे कोमल ध स्वर बजठ । अस्टक ४ ओ ५ नं. बिल्ला छोडके ६ नं. बिल्ला आधा टुमके १,२ ओ ३ नं. बिल्ला पुरा टुमके फुंकलेसे कोमल नि स्वर बजठ । अस्टक सुत्र अनुसार हिम्मत नै हारके लक्टारे सक्कु स्वर बजैना प्रयास करबी कलेसे अपनेन्के फेन बसिया बजैनम् सिपार हुइबी ओ थारु संस्कृतिक एकठो अल्ग्वाइ नैसेक्ना आंग बचैना प्रयास प्रयासमे लागे सेक्बी । यदि बसिया बजैना सिपार हुइबी टे भगवान कृष्णक् नन्हे १६ सय गोही टे नै,मने एकठो गोही टे जरुर फँसाइ सेक्बी । 

विजय चौधरी

– (सिसहनिया –९ बगरापुर, द्यौखर निवासी लेखक अच्कल जिल्ला शिक्षा कार्यालय दाङमे कार्यरत बटाँ ।)

बसियक शब्द सुनटी सोहावन 

विजय चौधरी

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